शुक्रवार, 26 दिसंबर 2025

30 Days Challenge

आपको 30 दिन challenge के हिसाब से 30 टॉपिक दिए जा रहे हैं और आपको नीचे कई सारी विधाएं दी गई हैं। इनमें से आप किसी भी एक विधा का चयन कर अपना लेखन कार्य कर सकते हैं। अच्छे लेखन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। 

Day One: प्रतियोगिता
Day Two: अंतरराष्ट्रीय ध्यान (Meditation) दिवस
Day Three: अनुशासन
Day Four: माँ
Day Five: पिता
Day Six: गुरु का महत्व
Day Seven: बचपन की यादें
Day Eight: सच्ची मित्रता
Day Nine: समय का मूल्य
Day Ten: मेहनत और सफलता
Day Eleven: नारी सम्मान
Day Twelve: शिक्षा का महत्व
Day Thirteen: युवा शक्ति
Day Fourteen: देशभक्ति
Day Fifteen: पर्यावरण संरक्षण
Day Sixteen: आत्मनिर्भर भारत
Day Seventeen: पुस्तकें हमारी मित्र
Day Eighteen: ध्यान और आत्मशांति
Day Nineteen: मौन की शक्ति
Day Twenty: कर्म और भाग्य
Day Twenty-One: विश्वास और आशा
Day Twenty-Two: जीवन का उद्देश्य
Day Twenty-Three: शब्दों की शक्ति
Day Twenty-Four: कलम की जिम्मेदारी
Day Twenty-Five: सपनों की उड़ान
Day Twenty-Six: एक अनकहा दर्द
Day Twenty-Seven: अकेलापन
Day Twenty-Eight: हार के बाद जीत
Day Twenty-Nine: मेरी भाषा – हिंदी
Day Thirty: मेरा भारत – मेरी पहचान

लेखन विधाएँ 

1.कविता, 2. मुक्त छंद कविता, 3. गीत, 4. ग़ज़ल, 5. दोहा, 6. सोरठा, 7. चौपाई, 8. कवित्त, 9. सवैया, 10. हाइकु (हिंदी), 11. बाल कविता, 12. राष्ट्रकाव्य 13.कहानी, 14. लघुकथा, 15. संस्मरण, 16. आत्मकथा (अंश), 17. जीवनी (संक्षिप्त), 18. निबंध, 19. अनुच्छेद, 20. यात्रा-वृत्तांत, 21. रेखाचित्र, 22. व्यंग्य लेख
एकांकी, 24. लघु नाटक, 25. संवाद लेखन, 26. दृश्य लेखन
विचार लेख, 28. चिंतनात्मक लेख, 29. प्रेरणात्मक लेख, 30. अनुभव लेखन
पत्र लेखन, 32. आवेदन पत्र, 33. डायरी लेखन, 34. सूचना लेखन, 35. विज्ञापन लेखन, 36. भाषण, 37. नारा लेखन
चित्र वर्णन, 39. भाव विस्तार, 40. कहानी पूरी करो, 41. कविता पूरी करो, 42. शीर्षक लेखन

बुधवार, 10 दिसंबर 2025

NCERT Class 8th Hindi Chapter 9 आदमी का अनुपात Question Answer

NCERT Class 8th Hindi Chapter 9 आदमी का अनुपात Question Answer

आदमी का अनुपात Class 8 Question Answer

कक्षा 8 हिंदी पाठ 9 प्रश्न उत्तर – Class 8 Hindi आदमी का अनुपात Question Answer

पाठ से प्रश्न- अभ्यास
(पृष्ठ 128-135)

आइए, अब हम इस कविता को थोड़ा और विस्तार से समझते हैं। नीचे दी गई गतिविधियाँ इस कार्य में आपकी सहायता करेंगी।

मेरी समझ से

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए । कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

प्रश्न 1.
कविता के अनुसार ब्रह्मांड में मानव का स्थान कैसा है?
पृथ्वी पर सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण
ब्रह्मांड की तुलना में अत्यंत सूक्ष्म
सूर्य, चंद्र आदि सभी नक्षत्रों से बड़ा
समस्त प्रकृति पर शासन करने वाला

उत्तर:
ब्रह्मांड की तुलना में अत्यंत सूक्ष्म

प्रश्न 2.
कविता में मुख्य रूप से किन दो वस्तुओं के अनुपात को दिखाया गया है?
पृथ्वी और सूर्य
देश और नगर
घर और कमरा
मानव और ब्रह्मांड

उत्तर:
मानव और ब्रह्मांड

प्रश्न 3.
कविता के अनुसार मानव किन भावों और कार्यों में लिप्त रहता है ?
त्याग, ज्ञान और प्रेम में
सेवा और परोपकार में
ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा में
उदारता, धर्म और न्याय में

उत्तर:
ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा में

प्रश्न 4.
कविता के अनुसार मानव का सबसे बड़ा दोष क्या है?
वह अपनी सीमाओं और दुर्बलताओं को नहीं समझता।
वह दूसरों पर शासन स्थापित करना चाहता है।
वह प्रकृति के साथ तालमेल नहीं बिठा पाता है।
वह अपने छोटेपन को भूल अहंकारी हो जाता है।

उत्तर:
वह अपने छोटेपन को भूल अहंकारी हो जाता है।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।

पंक्तियों पर चर्चा

नीचे दी गई पंक्तियों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। अपने समूह में इनके अर्थ पर चर्चा कीजिए और लिखिए-

(क) “अनगिन नक्षत्रों में / पृथ्वी एक छोटी /करोड़ों में एक ही।”
उत्तर:
अनेक तारा समूहों और ग्रहों के बीच हमारी पृथ्वी एक छोटी-सी इकाई है । हमारा पूरा ग्रह भी अनंत ब्रह्मांड के विशाल विस्तार में छोटा है।

(ख) “संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है / अपने को दूजे का स्वामी बताता है। ‘
उत्तर:
मनुष्य ने अपने को दूसरे मनुष्य से अलग कर लिया है। वह भेद-भाव और मनमुटाव के साथ जीवन व्यतीत कर रहा है। अविश्वास और कटुता को बढ़ाता
है। खुद को दूसरों से बेहतर साबित करने के चक्कर में मनुष्य बुराई के रास्ते पर चल रहा है।

(ग) “देशों की कौन कहे / एक कमरे में / दो दुनिया रचाता है।”
उत्तर:
ईश्वर ने सबको बनाया है और उसके लिए सब समान हैं परंतु मनुष्य तो इस सत्य को अनदेखा कर बैठा है। देश और दुनिया की छोड़ो, उसने तो अपने परिवार और संबंधों को भी धोखा देकर, अलग दुनिया में जीता है।



मिलकर करें मिलान

नीचे दो स्तंभ दिए गए हैं। अपने समूह में चर्चा करके स्तंभ 1 की पंक्तियों का मिलान स्तंभ 2 में दिए गए सही अर्थ से कीजिए ।

उत्तर:
1. 3
2. 5
3. 6
4. 2
5. 1
6. 4

अनुपात

इस कविता में ‘मानव’ और ‘ब्रह्मांड’ के उदाहरण द्वारा व्यक्ति के अल्पत्व और सृष्टि की विशालता के अनुपात को दिखाया गया है। अपने साथियों के साथ मिलकर विचार कीजिए कि मानव को ब्रह्मांड जैसा विस्तार पाने के लिए इनमें से किन-किन गुणों या मूल्यों की आवश्यकता होगी? आपने ये गुण क्यों चुने, यह भी साझा कीजिए ।

उत्तर:
मनुष्य को अपनी सोच को ब्रह्मांड की तरह व्यापक बनानी चाहिए। सृष्टि की विशालता से प्रेरणा लेकर मनुष्य को सार्थक जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए। सहअस्तित्व, समावेशिता, सौहार्द, सहयोग और सहनशीलता के गुण अपनाकर मनुष्य भी जीवन को और सुंदर बना सकता है। ईश्वर ने मनुष्य को असीम बुद्धि प्रदान की है और बुद्धि के सदुपयोग से मनुष्य नई ऊचाइयाँ छू सकता है।

सकारात्मक सोच और स्वभाव से हम सच्ची सफलता प्राप्त कर सकते हैं। अच्छे गुणों को अपनाने से न केवल हमारा जीवन बेहतर होगा, बल्कि हम एक बेहतर देश और दुनिया के निर्माण में भी योगदान दे सकेंगे।

सोच-विचार के लिए

कविता को पुनः पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए-

(क) कविता के अनुसार मानव किन कारणों से स्वयं को सीमाओं में बाँधता चला जाता है ?
(ख) यदि आपको इस कविता की एक पंक्ति को दीवार पर लिखना हो, जो आपको प्रतिदिन प्रेरित करे तो आप कौन-सी पंक्ति चुनेंगे और क्यों ?
(ग) कवि ने मानव की सीमाओं और कमियों की ओर ध्यान दिलाया है, लेकिन कहीं भी क्रोध नहीं दिखाया। आपको इस कविता का भाव कैसा लगा – व्यंग्य, करुणा, चिंता या कुछ और ? क्यों ?
(घ) आपके अनुसार ‘दीवारें उठाना’ केवल ईंट-पत्थर से जुड़ा काम है या कुछ और भी हो सकता है ? अपने विचारानुसार समझाइए।
(ङ) मानवता के विकास में सहयोग, समर्पण और सहिष्णुता जैसी सकारात्मक प्रवृत्तियाँ ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ और घृणा जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों से कहीं अधिक प्रभावी हैं। उदाहरण देकर बताइए कि सहिष्णुता या सहयोग के कारण समाज में कैसे परिवर्तन आए हैं?
उत्तर:
(क) मनुष्य कई कारणों से स्वयं को सीमित कर लेता है और अपने परिवार, समाज, देश और दुनिया से दूर हो जाता है। इसमें अंहकार, स्वार्थ, ईर्ष्या, विद्वेष, घृणा जैसी भावनाएँ शामिल हैं। ऐसी भावनाएँ या अवगुण मानव को दूसरों से अलग रहने और उन्हें अपने से तुच्छ, समझने की ओर ले जाती हैं। मनुष्य संबंधों के महत्त्व को नहीं समझ पाता और अपने अहंकार या स्वार्थ को पूरा करने में लगा रहता है।

(ख) अपने को दूजे का स्वामी बताता है
देशों की कौन कहे
एक कमरे में
दो दुनिया रचाता है

कविता की उपर्युक्त पंक्तियाँ मैं दीवार पर लिखना चाहूँगी क्योंकि मानव अपने छोटेपन को भूलकर अहंकारी और अति आत्मविश्वासी हो जाता है। यदि परिवार के सदस्यों के साथ ही प्रेम और सामंजस्य नहीं है तो हम देश और दुनिया को क्या सीख देंगे। ऊपर लिखी पंक्तियाँ मुझे याद दिलाएँगी कि उदारता, त्याग, सेवा और परोपकार जैसे गुणों को अपनाकर जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए।

(ग) हाँ, मैं इस बात से सहमत हूँ कि कवि ने मानव की कमियों और सीमाओं की ओर ध्यान दिलाया है, लेकिन कहीं भी क्रोध नहीं दिखाया। इस कविता में मुझे आत्मचिंतन और चिंता के भी भाव महसूस होते हैं। मानव स्वयं को संसार का सबसे बुद्धिमान व शक्तिशाली अंग समझता है। उसमें अहंकार है कि उसने विज्ञान व तकनीकी सहायता से सफलता हासिल कर ली है।

परंतु सच्चाई यह लगती है कि इस संपूर्ण ब्रह्मांड में हमारा स्थान अत्यंत सूक्ष्म है। मानव और ब्रह्मांड के अनुपात में काफी अंतर है । देश और दुनिया जीतने से पहले स्वयं पर अर्थात अपनी बुराइयों पर विजय प्राप्त करना ही सबसे बड़ी चुनौती है।

(घ) ‘दीवारें उठाना’ केवल ईंट-पत्थर से जुड़ा काम नहीं है। कविता के अनुसार इसका प्रतीक अर्थ है मानव जैसे-जैसे उन्नति कर रहा है, वैसे-वैसे अपने संबंधों से दूर होता जा रहा है। संसार की विराटता के विपरीत मानव आत्मकेंद्रित हो जाता है। अपने दिल की भावनाओं को जीवन की आपा-धापी में खो देता है। कभी-कभी अपनी सोच इतनी सीमित कर लेता है कि वह एक छोटे से कमरे में भी अपनों से ही दूर होकर दो दुनिया बना लेता है।

(ङ) मानवता के विकास में सहिष्णुता, सहनशक्ति और समर्पण जैसे गुणों का बहुत योगदान है। ये गुण न सिर्फ व्यक्तिगत जीवन को अच्छा बनाते हैं, बल्कि पूरे समाज को भी प्रगति की ओर ले जाते हैं। देश के विकास में सहयोग से सामूहिक प्रयास, समर्पण से निरंतरता व प्रगति और सहिष्णुता से सामाजिक एकता विकसित होती है। ये गुण मिलकर देश और समाज को मजबूत व समृद्ध बनाते हैं। उदाहरण – सहिष्णुता और सहयोग के कारण आज शिक्षा प्रणाली में कई बदलाव आए हैं। शिक्षा अधिक समावेशी हो रही है। विभिन्न सामाजिक व आर्थिक स्तर होने पर भी छात्रों को समान अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने व संसाधनों की कमी को दूर करने के प्रयास हुए हैं।

अनुमान और कल्पना

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए-

(क) मान लीजिए कि आप एक दिन के लिए पूरे ब्रह्मांड को नियंत्रित कर सकते हैं। अब आप मानव की कौन-कौन सी आदतों को बदलना चाहेंगे? क्यों ?
(ख) यदि आप अंतरिक्ष यात्री बन जाएँ और ब्रह्मांड के किसी दूसरे भाग में जाएँ तो आप किस स्थान (कमरा, घर, नगर आदि) को सबसे अधिक याद करेंगे और क्यों ?
(ग) मान लीजिए कि एक बच्चा या बच्ची कविता में उल्लिखित सभी सीमाओं को पार कर सकता या सकती है- वह कहाँ तक जाएगा या जाएगी और क्या देखेगा या देखेगी? एक कल्पनात्मक यात्रा-वृत्तांत लिखिए।
(घ) इस कविता को पढ़ने के बाद, आप स्वयं को ब्रह्मांड के अनुपात में कैसा अनुभव करते हैं? एक अनुच्छेद लिखिए–“मैं ब्रह्मांड में एक… हूँ।”
(ङ) मान लीजिए कि किसी दूसरे संसार से आपके पास संदेश आया है कि उसे पृथ्वी के किसी व्यक्ति की आवश्यकता है। आप किसे भेजना चाहेंगे और क्यों?
(च) कविता में “ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ” जैसी प्रवृत्तियों की चर्चा की गई है। कल्पना कीजिए कि एक दिन केलिए ये भाव सभी व्यक्तियों में समाप्त हो जाएँ तो उससे समाज में क्या-क्या परिवर्तन होगा ?
(छ) यदि आपको इस कविता का एक पोस्टर बनाना हो जिसमें इसके मूल भाव–’ विराटता और लघुता’ तथा ‘मनुष्य का भ्रम ‘ – दर्शाया जाए तो आप क्या चित्र, प्रतीक और शब्द उपयोग करेंगे? संक्षेप में बताइए ।
उत्तर:
(क) यदि मुझे एक दिन के लिए पूरे ब्रह्मांड पर नियंत्रण का अवसर मिले तो मैं इंसानों की कुछ आदतों को बदलना चाहूँगी। इसका उद्देश्य दुनिया को बेहत्तर और प्रभावशाली बनाने के लिए होगा ।

1. प्रदूषण फैलाने की प्रवृत्ति – मानव जैव और रासायनिक प्रदूषण फैला रहा है जो जीवन के लिए हानिकारक है। मैं सौर ऊर्जा और वायु ऊर्जा के वितरण में समानता सुनिश्चित करती।

2. धरती के अमूल्य संसाधनों की रक्षा करती। पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभावों को कम करने का प्रयास करती । किसी एक शक्तिशाली देश अपनी स्वार्थपूर्ति के लिए दुनिया को सीमाओं में बाँधने या बाँटने की प्रवृत्ति को बदलने का प्रयास करती।

3. जाति और धर्म के नाम पर विभाजन और असहिष्णुता की प्रवृत्ति को दूर करती और मानवता को सर्वोपरि रखती।

(ख) अगर मैं अंतरिक्ष यात्री बन जाँऊ और ब्रह्मांड के किसी दूसरे भाग में चली जाऊँ, तो मैं सबसे ज्यादा अपने घर और देश को याद करूँगी। घर का अहसास सुरक्षा प्रदान करता है। घर रिश्तों से बनता है जहाँ प्यार और अपनापन है।
देश से हमारी पहचान है। जिस देश की मिट्टी में जन्म लिया, वह माँ के समान है। अपने घर से जुड़ी एक-एक यादें अनमोल होती हैं और देश हमारी संस्कृति और इतिहास का अहसास कराता है।

(ग) एक बच्चे की नज़र से सीमाओं को पार करके यात्रा-वृत्तांत लिखना अनोखा अनुभव होगा। मेरी

यात्रा में मेरा पहला पड़ाव घर और मुहल्ला होगा। अपने परिवार, दोस्त, उनकी हँसी, बातें सुनते-सुनते मैं आगे दौड़ती हूँ।
दूसरा पड़ाव – नगर और शहर । ऊँची-ऊँची इमारतें, रंग-बिरंगी दुकानें, पुल और सड़कें ।

मैं अलग-अलग भाषाएँ सुनती और लोगों की चहल-पहल देखती हूँ । फिर प्रदेश और देश की ओर उड़ती हूँ। दूसरे राज्यों और फिर दूसरे देशों की ओर। अलग-अलग परिधान, खान-पान, त्योहारों और रीति-रिवाजों को समझते हुए आगे उड़ती हूँ। यहाँ कहीं शांति है तो कहीं संघर्ष, कहीं मेल-जोल तो कहीं विषमता नजर आती है। चौथे पड़ाव में पृथ्वी और ब्रह्मांड हैं।

भाषा शिक्षण सॉफ्टवेयर

मैं ऊपर अंतरिक्ष से पृथ्वी को देखती हूँ। पृथ्वी-एक नीला ग्रह, जिसमें जीवन की हर छटा और विविध विशेषताएँ हैं। बादलों के ऊपर उड़ते हुए समुद्र, पहाड़ और जंगल लुभाते हैं। फिर मैं ब्रह्मांड की यात्रा पर निकलती हूँ-अनगिनत तारे, नक्षत्र, ग्रह और आकाशगंगाएँ।

मैं सोचती हूँ कि ब्रह्मांड असीमित है और पृथ्वी के छोटे से घर के कमरे की मेरी दुनिया से अलग एक ओर ब्रह्मांड की विराटता तो दूसरी ओर मन की गहन यादें। इस यात्रा से मैंने सीखा कि सीमाएँ केवल दीवारों या घर के नक्शों में नहीं, बल्कि हमारी सोच में होती हैं। अगर खुले दिल से देखें तो पाएँगे कि मानवता अनंत है और इसकी कोई सीमा नहीं है।

(घ) “मैं ब्रह्मांड में एक छोटा मानव हूँ। मानव का अनुपात इसकी तुलना में छोटा है। मानव ने अपने दृष्टिकोण और सोच को भीं संकुचित कर लिया है। अखंड सृष्टि, आकाशगंगाएँ, तारामंडल, अरब प्रकाशवर्ष, इस विशाल ब्रह्मांड में पृथ्वी एक छोटे-से बिंदु के रूप में है। हमारा आकार लघु है परंतु हम मनुष्य अपनी दार्शनिक शक्ति, जिज्ञासा और बुद्धि के सदुपयोग से विशिष्ट पहचान बना सकते हैं। हमारी खोज, जिज्ञासा और कुछ नया करने की भावना की सीमा नहीं है।

मनुष्य अपने छोटे जीवन में अपने वातावरण को सुंदर और स्वच्छ बनाए रखने में सक्षम है। हमें ईश्वर द्वारा प्रदान किए गए इस जीवन का सम्मान करना चाहिए। ब्रह्मांड या अनंत की विशालता से हमें सबक लेना चाहिए और अपने आपको और बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए। हम सृष्टि के छोटे परंतु अभिन्न अंग हैं और मानवता के पथ पर चलते हुए जीवन को सफल बनाएँ।

(ङ) यदि दूसरे संसार से संदेश आता कि उन्हें पृथ्वी के किसी व्यक्ति की आवश्यकता है, तो मैं किसी प्रेरक, सहिष्णु और मानवता को धर्म समझने वाले व्यक्ति को भेजती । एक ऐसा व्यक्ति जो निष्पक्ष भाव से पृथ्वी का प्रतिनिधित्व करता और दोनों भागों के बीच संवाद स्थापित करने में सहयोग देता ।

(च) यदि एक दिन के लिए सभी व्यक्तियों में ईर्ष्या, अहंकार, स्वार्थ जैसी प्रवृत्तियाँ समाप्त हो जाएं तो समाज में क्रांतिकारी परिवर्तन आ जाएँगे। लोगों के बीच बैर, कटुता और विद्वेष की भावना मिट जाएगी। समाज में हर नागरिक उन्नति करेगा और देश समृद्ध व खुशहाल बनेगा। बुरी भावनाओं के मिट जाने से आदर्श स्थापित होंगे और मनुष्य अपनी वास्तविक क्षमताओं व शक्तियों को पहचान पाएगा। संतोष, करुणा, शांति से भरकर जीवन साकार हो जाएगा।

(छ) ‘विराटता और लघुता’ तथा ‘मनुष्य का भ्रम’ पोस्टर बनाने के लिए निम्नलिखित प्रतीकों, शब्दों और चित्रों को प्रयोग होगा-

1. चित्र – आकाशगंगा का चित्र जिसमें नक्षत्र, तारामंडल और सैटेलाइट से ली गई पृथ्वी की तस्वीरें लगाई जा सकती हैं।

2. मनुष्य के चित्र -ध्यान मुद्रा में अंकित व्यक्ति, मानव मस्तिष्क का चित्र ।

3. प्रतीक रूप में मस्तिष्क और हृदय को उजागर करेंगे।

4. शब्दों में ब्रह्मांड और मानव आकार, अनंतता, आत्मबोध मानव की लघुता, निजी जीवन, संकुचित सोच, उदात्त विचार आदि शब्दों का प्रयोग किया जा सकता है।

शब्द से जुड़े शब्द

नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में ‘सृष्टि’ से जुड़े शब्द अपने समूह में चर्चा करके लिखिए-

उत्तर:


सृजन

(क) कविता में कमरे से लेकर ब्रह्मांड तक का विस्तार दिखाया गया है। इस क्रम को अपनी तरह से एक रेखाचित्र, सीढ़ी या ‘मानसिक चित्रण’ (माइंड-मैप) द्वारा प्रदर्शित कीजिए। प्रत्येक स्तर पर कुछ विशेषताएँ लिखिए, जैसे-पास- – पड़ोस की एक विशेष बात, नगर का कोई स्थान, देश की विविधता आदि। उसके नीचे एक पंक्ति में इस प्रश्न का उत्तर लिखिए- “मैं इस चित्र में कहाँ हूँ और क्यों ?”
(ख) अगर इसी कविता की तरह कोई कहानी लिखनी हो जिसका नाम हो ‘ब्रह्मांड में मानव’ तो उसको आरंभ कैसे करेंगे? कुछ वाक्य लिखिए।
(ग) ‘एक कमरे में दो दुनिया रचाता है’ पंक्ति को ध्यान से पढ़िए। अगर आपसे कहा जाए कि आप एक ऐसी दुनिया बनाइए जिसमें कोई दीवार न हो तो वह कैसी होगी? उसका वर्णन कीजिए।
(घ) एक चित्र श्रृंखला बनाइए जिसमें ये क्रम दिखे-
आदमी → कमरा → घर → पड़ोसी क्षेत्र → नगर → देश → पृथ्वी → ब्रह्मांड
प्रत्येक चित्र में आकार का अनुपात दिखाया जाए जिससे यह स्पष्ट हो कि आदमी कितना छोटा है।
उत्तर:
सृजन गतिविधि छात्रगण, अध्यापक और माता-पिता की सहायता से कीजिए ।

कविता की रचना

‘दो व्यक्ति कमरे में
कमरे से छोटे-
इन पंक्तियों में चिह्न पर ध्यान दीजिए। क्या आपने इस चिह्न को पहले कहीं देखा है ? इस चिह्न को ‘निदेशक चिह्न’ कहते हैं । यह एक प्रकार का विराम चिह्न है जो किसी बात को आगे बढ़ाने या स्पष्ट करने के लिए उपयोग होता है। यह किसी विषय की अतिरिक्त जानकारी, जैसे – व्याख्या, उदाहरण या उद्धरण देने के लिए उपयोग होता है। इस कविता में इस चिह्न का प्रयोग एक ठहराव, सोच का संकेत और आगे आने वाले महत्त्वपूर्ण विचार की ओर पाठक का ध्यान आकर्षित करने के लिए किया गया है। यह संकेत देता है कि अब कुछ ऐसा कहा जाने वाला है जो पाठक को सोचने पर विवश करेगा।

इस कविता में ऐसी अनेक विशेषताएँ छिपी हैं, जैसे-अधिकतर पंक्तियों का अंतिम शब्द ‘में’ है, बहुत छोटी-छोटी पंक्तियाँ हैं आदि ।


(क) अपने समूह के साथ मिलकर कविता की अन्य विशेषताओं की सूची बनाइए । अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
उत्तर:
कविता की विशेषताओं की सूची भाषा सरल और सहज है। छात्रों को आसानी से समझ आती है।
कविता में छोटे-छोटे वाक्यों का प्रयोग है।
व्यंग्य शैली का प्रयोग है।
लय और गेयता गुण विद्यमान है।
अलंकारों का सुंदर प्रयोग है।

भाषा शिक्षण सॉफ्टवेयर

(ख) नीचे इस कविता की कुछ विशेषताएँ और वे पंक्तियाँ दी गई हैं जिनमें ये विशेषताएँ झलकती हैं। विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए-

उत्तर:
1. 4
2. 1
3. 2
4. 3
5. 5
6. 6

कविता का सौंदर्य

नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपने समूह में मिलकर खोजिए। इन प्रश्नों से आप कविता का आनंद और अच्छी तरह से ले सकेंगे।



(क) कविता में अलग-अलग प्रकार से ब्रह्मांड की विशालता को व्यक्त किया गया है। उनकी पहचान कीजिए।
(ख) “संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है
“अपने को दूजे का स्वामी बताता है’
“एक कमरे में
दो दुनिया रचाता है”
कविता में ये सारी क्रियाएँ मनुष्य के लिए आई हैं। आप अपने अनुसार कविता में नई क्रियाओं का प्रयोग करके कविता की रचना कीजिए ।
उत्तर:
(क) कविता में ब्रह्मांड की विशालता को अलग-अलग प्रकार से व्यक्त किया गया है-

1. कमरे से ब्रह्मांड तक की श्रृंखला द्वारा (भौतिक संरचना)
व्यक्ति → छोटा कमरा → घर → मुहल्ला → नगर → प्रदेश → देश → पृथ्वी → नक्षत्र → आकाशगंगा → त → ब्रह्मांड ।

2. गणना या संख्या के आधार पर तुलना
दो व्यक्ति → कई देश → कई पृथ्वी → अनगिन नक्षत्र → एक छोटी पृथ्वी → करोड़ो में एक → लाखों ब्रह्मांड।

3. आत्म चिंतन – विशाल और विराट ब्रह्मांड में मानव एक बिंदु समान है। वह श्रृंखला की छोटी कडी है परंतु स्वार्थ और अहंकार के कारण अपनी भावनाओं को ही बाँध दिया है। मन की बुराइयों से दीवारें खड़ी कर दी हैं।

(ख) नई क्रियाओं कर प्रयोग करके कविता की रचना ।
आदमी हैं कमरे में
कमरा है कैमरे में,
कैमरा है नए ऐप में,
नया ऐप है ब्रांडेड मोबाइल में
मोबाइल है पॉकेट में
और आदमी सिमट गया है
एडवांस तकनीक में ….

आदमी का घर है-
पहले वाई-फाई जुड़ता है
फिर बचे रिश्ते
स्क्रीत टाइम में सिमट गई है
बातों की फुहार और
हंसी की बहती लहरें
डिजिटल घड़ी नाम लेती है
चलते कदम
ऊँची दीवारों में उलझा है आदमी …
पल भर के लिए क्यों नहीं लेता है दम ?

आपके शब्द



“सबको समेटे है
परिधि नभ गंगा की’
आपने ‘आकाशगंगा’ शब्द सुना और पढ़ा होगा । लेकिन कविता में ‘नभ गंगा’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया है। यह शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है।
आप भी अपने समूह में मिलकर इसी प्रकार दो शब्दों को मिलाकर नए शब्द बनाइए।
उत्तर:

1. आकाशमंडल

2. भाग्यलक्ष्मी

3. सिनेमाघर

4. देवदूत

5. रेलगाड़ी

विशेषण और विशेष्य


“पृथ्वी एक छोटी ”
यहाँ ‘छोटी’ शब्द ‘पृथ्वी’ की विशेषता बता रहा है अर्थात ‘छोटी’ ‘विशेषण’ है। ‘पृथ्वी’ एक संज्ञा शब्द है जिसकी विशेषता बताई जा रही है। अर्थात ‘पृथ्वी’ ‘विशेष्य’ शब्द है।
अब आप नीचे दी गई पंक्तियों में विशेषण और विशेष्य
शब्दों को पहचानकर लिखिए-

उत्तर:


पंक्ति

विशेषण

विशेष्य


1. दो व्यक्ति कमरे में

दो

व्यक्ति


2. अनगिन नक्षत्रों में

अनगिन

नक्षत्र


3. लाखों ब्रह्मांडों में

लाखों

ब्रह्मांडों


4. अपना एक ब्रह्मांड

एक

ब्रह्मांड


5. संख्यातीत शंख सी

संख्यातीत

शंख


6. एक कमरे में

एक

कमरे


7. दो दुनिया रचाता है

दो

दुनिया


पाठ से आगे
(पृष्ठ 135-139)



प्रश्न- अभ्यास आपकी बात

(क) कोई ऐसी स्थिति बताइए जहाँ ‘अनुपात’ बिगड़ गया हो – जैसे काम का बोझ अधिक और समय कम।
उत्तर:
पहली स्थिति – आपातकालीन स्थिति – इस स्थिति में, जैसे कि भूंकप, बाढ़, बचाव दल को बहुत कम समय में लोगों की जान बचाने की आवश्यकता होती है।

(ख) आप अपने परिवार, विद्यालय या मोहल्ले में ‘विराटता’ (विशाल दृष्टिकोण) कैसे ला सकते हैं? कुछ उपाय सोचकर लिखिए। (संकेत – किसी को अनदेखा न करना, सबकी सहायता करना आदि)
उत्तर:
एक रेस्तरां में ग्राहक बहुत ज्यादा आ रहे हैं परंतु काम करने के लिए पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं।

संख्यातीत शंख

“संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है”
शंख का अर्थ है— 100 पद्म की संख्या ।
नीचे भारतीय संख्या प्रणाली एक तालिका के रूप में दी गई है।

तालिका के आधार पर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर खोजिए-

1. जिस संख्या में 15 शून्य होते हैं, उसे क्या कहते हैं?

2. महाशंख में कितने शून्य होते हैं?

3. एक लाख में कितने हजार होते हैं?

4. उपर्युक्त तालिका के अनुसार सबसे छोटी और सबसे बड़ी संख्या कौन-सी है ?

5. दस करोड़ और एक अरब को जोड़ने पर कौन-सी संख्या आएगी?



समावेशन और समानता

जैसे पृथ्वी अनगिनत नक्षत्रों में एक छोटा-सा ग्रह है, वैसे ही प्रत्येक व्यक्ति, चाहे वह विशेष आवश्यकता वाला हो या न हो, समाज का एक महत्त्वपूर्ण भाग है।

प्रश्न – एक समूह चर्चा आयोजित करें जिसमें सभी मानवों के लिए समान अवसरों की आवश्यकता पर बल दिया जाए। (भले ही उनका जेंडर, आय, मत, विश्वास, शारीरिक रूप, रंग या आकार – प्रकार आदि कैसा भी हो)
उत्तर:
जैसे पृथ्वी असंख्य नक्षत्रों में एक छोटा सा ग्रह है, वैसे ही जीवन की परिस्थितियों में प्रत्येक व्यक्ति चाहे वह छोटा हो या रूप-रंग में भिन्न हो, समाज का महत्त्वपूर्ण भाग है। हर व्यक्ति का अपना महत्त्व और स्थान है और वह समाज का अंग होता है। जैसे विद्यालय में प्रत्येक विद्यार्थी का महत्त्व होता है और हर विद्यार्थी का शिक्षा पर समान अधिकार होता है।

हर छात्र की अपनी क्षमताएँ, प्रतिभाएँ और परिस्थितियाँ होती हैं। अध्यापक के लिए सभी विद्यार्थी समान होते हैं। छात्रों की क्षमता के अनुसार उनमें कौशल विकसित करने की जिम्मेदारी होती है। इसी प्रकार समाज विभिन्न प्रकार के लोगों से मिलकर बनता है। हर व्यक्ति, चाहे वह किसी भी क्षेत्र में काम करता हो, समाज के विकास में योगदान देता है। सभी व्यक्ति मिलकर एक मजबूत और खुशहाल समाज का निर्माण करते हैं।

आज की पहेली

पता लगाइए कि कौन-सा अंतरिक्ष यान कौन-से ग्रह पर जाएगा-


झरोखे से

आइए, अब पढ़ते हैं प्रसिद्ध गीत ‘होंगे कामयाब ‘।

होंगे कामयाब!

होंगे कामयाब
होंगे कामयाब
हम होंगे कामयाब… एक दिन



मन में है विश्वास पूरा विश्व
हम होंगे कामयाब…. एक दिन
होगी शांति चारों ओर

होगी शांति चारों ओर
होगी शांति चारों ओर… एक दिन
मन में है विश्वास
पूरा है विश्वास, हम होंगे कामयाब… एक दिन
नहीं डर किसी का आज
नहीं भय किसी का आज

नहीं डर किसी का
आज के दिन
मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास
हम होंगे कामयाब … एक दिन

हम चलेंगे साथ-साथ डाल हाथों में हाथ
हम चलेंगे साथ-साथ… एक दिन मन में है विश्वास पूरा है विश्वास
हम होंगे कामयाब … एक दिन

भावांतर
– गिरिजा कुमार माथुर

साझी समझ

गिरिजा कुमार माथुर की अन्य रचनाएँ पुस्तकालय या इंटरनेट पर खोजकर पढ़िए और कक्षा में साझा कीजिए ।

खोजबीन के लिए
हम होंगे कामयाब एक दिन
https://www.youtube.com/ watch?v=xlTlzqvMa Q
https : //www.youtu be .c om / watch?v=dJ7BW1CgoWI
कल्पना जो सितारों में खो गई
https://www.youtube.com /watch?v=XhvOL2frHn8
सुनीता अंतरिक्ष में
https://www.youtube.com /watch?v=IlcDmCthPaA
ब्रह्माण्ड और पृथ्वी
https://www.youtube.com/ watch?v=b8udjzy7zCA
हौसलों की उड़ान-मंगलयान https://www.youtube.com /watch?v=JTCk48RT1Ws

NCERT Class 8th Hindi Chapter 8 नए मेहमान Question Answer

NCERT Class 8th Hindi Chapter 8 नए मेहमान Question Answer

कक्षा 8 हिंदी पाठ 8 प्रश्न उत्तर – Class 8 Hindi नए मेहमान Question Answer

पाठ से प्रश्न-अभ्यास
(पृष्ठ 117-122)

आइए, अब हम इस एकांकी को थोड़ा और विस्तार से समझते हैं। नीचे दी गई गतिविधियाँ इस कार्य में आपकी सहायता करेंगी।

मेरी समझ से

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए । कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

प्रश्न 1.
आगंतुकों ने विश्वनाथ के बच्चों को ‘सीधे लड़के’ किस संदर्भ में कहा?
अतिथियों की सेवा करने के कारण
किसी तरह का प्रश्न न करने के कारण
आज्ञाकारिता के भाव के कारण
गरमी को चुपचाप सहने के कारण

उत्तर:
अतिथियों की सेवा करने के कारण

प्रश्न 2.
“एक ये पड़ोसी हैं, निर्दयी …… “विश्वनाथ ने अपने पड़ोसी को निर्दयी क्यों कहा?
उन्हें कष्ट में देखकर प्रसन्न होते हैं
पड़ोसी किसी प्रकार का सहयोग नहीं करते हैं
लड़ने-झगड़ने के अवसर ढूँढ़ते हैं
अतिथियों का अपमान करते हैं।

उत्तर:
उन्हें कष्ट में देखकर प्रसन्न होते हैं



प्रश्न 3.
“ईश्वर करें इन दिनों कोई मेहमान न आए। ” रेवती इस तरह की कामना क्यों कर रही है?
मेहमान के ठहरने की उचित व्यवस्था न होने के कारण
रेवती का स्वास्थ्य कुछ समय से ठीक न होने के कारण
अतिथियों के आने से घर का कार्य बढ़ जाने के कारण
उसे अतिथियों का आना-जाना पसंद न होने के कारण

उत्तर:
मेहमान के ठहरने की उचित व्यवस्था न होने के कारण
रेवती का स्वास्थ्य कुछ समय से ठीक न होने के कारण
अतिथियों के आने से घर का कार्य बढ़ जाने के कारण

प्रश्न 4.
“हे भगवान! कोई मुसीबत न आ जाए।” रेवती कौन-सी मुसीबत नहीं आने के लिए कहती है?
पानी की कमी होने की
पड़ोसियों के चिल्लाने की
मेहमानों के आने की
गरमी के कारण बीमारी की

उत्तर:
मेहमानों के आने की



प्रश्न 5.
इस एकांकी के आधार पर बताएँ कि मुख्य रूप से कौन-सी बात किसी रचना को नाटक का रूप देती है?
संवाद
वर्णन
कथा
मंचन

उत्तर:
संवाद
मंचन



(ख) हो सकता है कि आप सभी ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अब अपने सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर:
हमने जो उत्तर चुने हैं वे नाटक के अनुसार पूरी तरह से उचित हैं।



पंक्तियों पर चर्चा

पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए । आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपनी कक्षा में साझा कीजिए ।

(क) “पानी पीते-पीते पेट फूला जा रहा है, और प्यास है कि बुझने का नाम नहीं लेती।”
(ख) “सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो।”
(ग) “यह तो हमारा ही भाग्य है कि चने की तरह भाड़ में भुनते रहते हैं।”
(घ) “आह, अब जान में जान आई। सचमुच गरमी में पानी ही तो जाऩ है।”
उत्तर:
(क) इस पंक्ति का अर्थ यह है कि अत्यधिक गरमी के
कारण बार-बार प्यास से गला सूख जाता है। साथ ही पानी पी-पीकर पेट पूरी तरह से भर जाता है और अब पेट में और पानी पीने के लिए जगह नहीं बचती, पर प्यास से होंठ और गला बार-बार सूख रहा है।



(ख) प्रस्तुत पंक्ति का आशय यह है कि शहर में अत्यधिक गरमी पड़ रही है और गर्मी भी इतनी ज्यादा और तेज है कि ऐसा लगता है मानो सूरज देवता धरती पर आग बरसा रहे हों ।

(ग) लेखक बताता है कि मुख्य पात्र विश्वनाथ और उसकी पत्नी रेवती गरीब होने के कारण अपने छोटे से मकान में हर साल गरमी का प्रकोप झेलते हैं। उनके डिब्बे जैसे बंद मकान में कहीं से भी हवा नहीं आती। इसी कारण वे गरमी से इतना ज्यादा झुलसते हैं मानों जैसे भट्ठी में चने को भूना जा रहा हो। वे यह सब अपना नसीब मानकर झेलते हैं।

(घ) प्रस्तुत पंक्ति विश्वनाथ के घर पहुँचे अनजान मेहमान नन्हेमल ने कही थी। जब वह गरमी से बेहाल था और उसने ठंडा पानी पिया, उस समय सचमुच उसकी जान में जान आई। यह बात सच भी है गरमी में बस एक पानी ही होता है जो अमृत समान लगता है और शरीर में जान डाल देता है।

मिलकर करें मिलान

स्तंभ 1 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं और स्तंभ 2 में उनसे मिलते-जुलते भाव दिए गए हैं। स्तंभ 1 की पंक्तियों को स्तंभ 2 की उनके सही भाव वाली पंक्तियों से रेखा खींचकर मिलाइए –

उत्तर:
1. 3
2. 4
3. 5
4. 1
5. 2

सोच-विचार के लिए



एकांकी को पुनः पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए-

(क) “ शहर में तो ऐसे ही मकान होते हैं। ” नन्हेमल का ‘ऐसे ही मकान’ से क्या आशय है?
(ख) पड़ोसी को विश्वनाथ से किस तरह की शिकायत है? आपके विचार से पड़ोसी का व्यवहार उचित है या अनुचित ? तर्क सहित उत्तर दीजिए ।
(ग) एकांकी में विश्वनाथ नन्हेमल और बाबूलाल को नहीं जानता है, फिर भी उन्हें अपने घर में आने देता है। क्यों?
(घ) एकांकी के उन संवादों को ढूँढ़कर लिखिए जिनसे पता चलता है कि बाबूलाल और नन्हेमल विश्वनाथ के परिचित नहीं हैं?
(ङ) एकांकी के उन वाक्यों को ढूँढ़कर लिखिए जिनसे पता चलता है कि शहर में भीषण गरमी पड़ रही है।
उत्तर:
(क) ‘ऐसे ही मकान’- से नन्हेमल का आशय था कि शहर में डिब्बे जैसे बहुत ही बेकार मकान हैं। उनमें ना तो हवा आती है ना ही धूप । इन मकानों में रहना तो किसी जेल में रहने से कम नहीं, परंतु अब तो शहरों में प्रायः मध्यमवर्ग के पास ऐसे ही सुविधाहीन मकान हैं।

(ख) पड़ोसी को विश्वनाथ से यह शिकायत थी कि विश्वनाथ के घर अक्सर मेहमान आते रहते हैं और वह उसकी छत पर हाथ-मुँह धोते समय गंदा पानी बिखेर देते हैं। इसी कारण पड़ोसी विश्वनाथ से लड़ने उसके घर चला गया और उसे भला-बुरा कहने लगा। पड़ोसी का यह व्यवहार पूरी तरह से अनुचित था। एक अच्छे पड़ोसी को सहयोग के साथ रहना चाहिए।



(ग) विश्वनाथ, नन्हेमल और बाबूलाल को नहीं जानता था, परंतु फिर भी उन्हें अपने घर के अंदर इसलिए आने देता है क्योंकि विश्वनाथ एक सरल और संस्कारी व्यक्ति था । वह कभी किसी का अपमान नहीं करता था। दूसरी बात यह थी कि उसे लग रहा था कि अगर ये मेरे घर आएँ हैं तो संभवतः किसी ने तो इन्हें मेरे पास अवश्य भेजा होगा और इसी बात को जानने के लिए वह उन्हें पूछ भी रहा था कि आप कहाँ से आएँ हैं?

(घ) विश्वनाथ – जी, आप लोग…
विश्वनाथ – क्षमा कीजिए, आप कहाँ से पधारे हैं?
नन्हेमल – अरे, आप नहीं जानते ! वह लाला संपतराम हैं ना गोटेवाले,
विश्वनाथ – मैं संपतराम को नहीं जानता ।
विश्वनाथ – आप कहाँ से आए हैं ?
रेवती – ये लोग कौन हैं ? जान-पहचान के तो मालूम नहीं होते।
विश्वनाथ – ना जाने कौन हैं?
रेवती – पूछ लो न?
विश्वनाथ – क्या पूछ लूँ? दो-तीन बार पूछा, ठीक से उत्तर ही नहीं देते।
नन्हेमल – हाँ, हाँ पूछिए, मालूम होता है, आपने हमें पहचाना नहीं।
विश्वनाथ – तो आप कोई चिट्ठी-विट्ठी लाए हैं ?
विश्वनाथ – (खीझकर) जिसके यहाँ आपको जाना है उसका नाम भी तो बताया होगा ?
बाबूलाल – क्या नाम था चाचा?
नन्हेमल – नाम तो याद नहीं आता । जरा ठहरिए, सोच लूँ।
बाबूलाल – अरे चाचा ! कविराज बताया था।
विश्वनाथ – लेकिन मैं कविराज तो नहीं हूँ ।
विश्वनाथ – आपको जिनके यहाँ जाना था, वे काम क्या करते हैं?
नन्हेमल – हाँ, याद आया। बताया था वैद्य हैं।
विश्वनाथ – पर मैं तो वैद्य नहीं हूँ।



(ङ) विश्वनाथ – ओह! बड़ी गरमी है! इन बंद मकानों में रहना कितना भयंकर है? मकान हैं कि भट्ठी !
रेवती – पत्ता तक नहीं हिल रहा है। जैसे सांस बंद हो जाएगी। सिर फटा जा रहा है।
रेवती – आँगन में घड़े में भी पानी ठंडा नहीं होता ।
विश्वनाथ – पानी पीकर पेट फूला जा रहा है और प्यास है कि बुझने का नाम ही नहीं लेती।
विश्वनाथ – सारे शहर में जैसे आग बरस रही है। यहाँ की गरमी से तो ईश्वर बचाए ।
विश्वनाथ – सारा शरीर मारे गरमी के उबल रहा है।
रेवती – चारों तरफ दीवारें तप रही हैं।
नन्हेमल – बड़ी गरमी है क्या कहें। कपड़े तो ऐसे हो गए हैं कि निचोड़ लो।
बाबूलाल – ठंडा-ठंडा पानी पिलाओ, प्राण सूखे जा रहे हैं।

अनुमान और कल्पना से



अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए-

(क) एकांकी में विश्वनाथ अपनी पत्नी को अतिथियों के लिए भोजन की व्यवस्था करने के लिए कहता है। साथ ही रेवती की अस्वस्थता का विचार करके भोजन बाजार से मँगवाने का सुझाव भी देता है। लेकिन उसने स्वयं अतिथियों के लिए भोजन बनाने के विषय में क्यों नहीं सोचा ?
उत्तर:
अतिथियों के आने पर विश्वनाथ ने अपनी पत्नी रेवती से भोजन बनाने के लिए कहा क्योंकि रेवती उसकी पत्नी थी और घर में भोजन वही बनाया करती थी । विश्वनाथ पूरा दिन काम करके शाम को घर लौटा था और उसे भोजन बनाना भी नहीं आता था। जब उसकी पत्नी ने सिद दर्द की बात कही तो विश्वनाथ ने बाहर से भोजन मँगवाने के लिए कहा, जिस पर उसकी पत्नी ने मेहमानों पर रुपये खर्च करने के लिए मना कर दिया। इन सभी कारणों से विश्वनाथ ने ‘रेवती’ से भोजन बनाने के लिए कहा।

(ख) एकांकी में विश्वनाथ का बेटा प्रमोद अतिथियों के पेयजल की व्यवस्था करता है और छोटी बहन का भी ध्यान रखता है। प्रमोद को इस तरह के उत्तरदायित्व क्यों दिए गए होंगे ?
उत्तर:
‘प्रमोद’, विश्वनाथ का बड़ा बेटा था और किरण उसकी छोटी बहन । विश्वनाथ ने बेटे को बर्फ लाने और मेहमानों को पानी पिलाने को इसलिए कहा होगा जिससे कि वह अपने बेटे में उत्तम संस्कार डाल सके तथा घर आए मेहमानों का सत्कार करना सीखे। इसके साथ ही छोटी बहन का ध्यान रखकर वह अपने कर्तव्यों को भी सीखेगा और घर में अपनी जिम्मेदारी को समझेगा।

(ग) “ कैसी बातें करते हो, भैया! मैं अभी खाना बनाती हूँ” भीषण गरमी और सिर में दर्द के बावजूद भी रेवती भोजन की व्यवस्था करने के लिए क्यों तैयार हो गई होगी?
उत्तर:
भीषण गर्मी और सिर दर्द के बावजूद भी रेवती खाना बनाने को इसलिए तैयार हो गई क्योंकि अब मेहमान के रूप में उसका भाई आया था। भाई को देखकर तो रेवती का सारा सिर दर्द दूर हो गया। वह अपने भाई की अच्छी-सी खातिरदारी करना चाहती थी, इसी कारण उसने मिठाई का प्रबंध करने की बात की; साथ ही खुशी-खुशी अपने भाई के लिए भोजन बनाने की तैयारी में लग गई।

(घ) एकांकी से गरमी की भीषणता दर्शाने वाली कुछ पंक्तियाँ दी जा रही हैं। अपनी कल्पना और अनुमान से बताइए कि सर्दी और वर्षा की भीषणता के लिए आप इनके स्थान पर क्या-क्या वाक्य प्रयोग करते हैं? अपने वाक्यों को दिए गए उचित स्थान पर लिखिए।

उत्तर:


गरमी की भीषणता दर्शाने वाली पंक्तियाँ

सर्दी की भीषणता दर्शाने वाली पंक्तियाँ

वर्षा की भीषणता दर्शाने वाली पंक्तियाँ


1. यह गरमी में भुन रहा है।

यह सर्दी में जम गया।

यह वर्षा में भीग रहा है।


2. पर बरफ भी कोई कहाँ तक पिए।

गर्म चाय भी ठंडी हो गई।

तेज वर्षा से फसल बह गई।


3. सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो।

पूरा शहर ठंड से अकड़ रहा है।

पूरे शहर में वर्षा का जल भर गया।


4. प्यास है कि बुझने का नाम नहीं लेती।

सर्दी है कि कम होने का नाम नहीं ले रही।

वर्षा है कि रुकने का नाम नहीं ले रही।


5. चारों तरफ दीवारें तप रही हैं।

ठंडे फर्श पर पैर रखने से पैरों का खून जम गया।

वर्षा में छत टपक रही है। तेज वर्षा से पानी घर के अंदर आ रहा है।


6. ठंडा-ठंडा पानी पिलाओ दोस्त, प्राण सूखे जा रहे हैं।

गर्म चाय पिलाओ दोस्त ठंड से जमे जा रहे हैं।

छतरी दे दो मित्र, बारिश से भीग रहा हूँ।


7. सचमुच गरमी में पानी ही तो जान है।

गर्म-गर्म चाय से ठंड थोड़ी कम हुई।

वर्षा में चाय-पकौड़े से आनंद ही आ गया।


8. यह तो हमारा ही भाग्य है कि चने की तरह भाड़ में भुनते रहते हैं।

गरीबी के कारण ठंड में जमना पड़ रहा है।

टूटी छत के कारण सारे घर में पानी टपक रहा है।


9. फिर भी पसीने से नहा गया हूँ।

वर्षा की भीषणता दर्शाने वाली पंक्तियाँ

‘वर्षा में पूरा भीग चुका हूँ।


एकांकी की रचना



इस एकांकी के आरंभ में पात्र – परिचय, स्थान, समय और विश्वनाथ और रेवती के घर के विषय में बताया गया है, जैसे कि –
“गरमी की ऋतु, रात के आठ बजे का समय । कमरे के पूर्व की ओर दो दरवाजे…”
विश्वनाथ – उफ्फ, बड़ी गरमी है (पंखा जोर-जोर से करने लगता है) इन बंद मकानों में रहना कितना भयंकर है। मकान है कि भट्टी !
(पश्चिम की ओर से एक स्त्री प्रवेश करती है)
रेवती – (आँचल से मुँह का पसीना पोंछती हुई) पत्ता तक नहीं हिल रहा है। जैसे साँस बंद हो जाएगी। सिर फटा जा रहा है।

एकांकी की इन पंक्तियों को ध्यान से पढ़िए। इन्हें पढ़कर स्पष्ट पता चल रहा है कि पहली पंक्ति समय और स्थान आदि के विषय में बता रही है। इसे रंगमंच – निर्देश कहते हैं। वहीं दूसरी पंक्तियों से स्पष्ट है कि ये दो लोगों द्वारा कही गई बातें हैं। इन्हें संवाद कहा जाता है। ये ‘नए मेहमान’ एकांकी का एक अंश है।

एकांकी एक प्रकार का नाटक होता है जिसमें केवल एक ही अंक या भाग होता है। इसमें किसी कहानी या घटना को संक्षेप में दर्शाया जाता है। आप इस एकांकी में ऐसी अनेक विशेषताएँ खोज सकते हैं। (जैसे- इस एकांकी में कुछ संकेत कोष्ठक में दिए गए हैं, पात्र – परिचय, अभिनय संकेत, वेशभूषा संबंधी निर्देश आदि ।)

(क) अपने समूह में मिलकर इस एकांकी की विशेषताओं की सूची बनाइए।
उत्तर:
एकांकी की विशेषताएँ

1. कहानी के आरंभ में पात्रों का परिचय

2. मंचन हेतु स्थान का उचित रेखाचित्र

3. पात्रों के वस्त्र एवं कमरे की सजावट कथानुसार पूर्वतः उचित

4. प्रभावशाली, संक्षिप्त एवं पूर्ण संवाद

5. कथा विस्तार हेतु सामान्य निर्देश, सटीकता से प्रस्तुत

6. जिज्ञासायुक्त प्रश्नों का पूर्ववत समाधान

7. कथा का अंत संतोषजनक एवं पूर्ण ।

(ख) आगे कुछ वाक्य दिए गए हैं। एकांकी के बारे में जो वाक्य आपको सही लग रहे हैं, उनके सामने ‘हाँ’ लिखिए। जो वाक्य सही नहीं लग रहे हैं, उनके सामने ‘नहीं’ लिखिए ।

उत्तर:


वाक्य

हाँ /नहीं


1. ‘नए मेहमान’ एकांकी में पूरी कहानी एक ही स्थान, घर में घटित होती दिखाई गई है।

हाँ


2. एकांकी में पात्रों की संख्या बहुत अधिक है।

नहीं


3. एकांकी में एक कहानी छिपी है।

हाँ


4. एकांकी और कहानी में कोई अंतर नहीं है।

हाँ


5. एकांकी में कहानी की घटनाएँ अलग-अलग दिनों या महीनों में हो रही हैं।

नहीं


6. एकांकी में कहानी मुख्य रूप से संवादों से आगे बढ़ती है।

हाँ


7. एकांकी में पात्रों को अभिनय के लिए निर्देश दिए गए हैं।

हाँ




अभिनय की बारी

(क) क्या आपने कभी मंच पर कोई एकांकी या नाटक देखा है ? टीवी पर फिल्में और धारावाहिक तो अवश्य देखे होंगे! अपने अनुभवों से बताइए कि यदि आपको अपने विद्यालय में ‘नए मेहमान’ एकांकी का मंचन करना हो तो आप क्या – क्या तैयारियाँ करेंगे।
(उदाहरण के लिए- इस एकांकी में आप क्या – क्या जोड़ेंगे जिससे यह और अधिक रोचक बने, कौन-से पात्र जोड़ेंगे या पात्रों की वेशभूषा क्या रखेंगे ?)
उत्तर:
हमें यह नाटक बहुत मजेदार लगा, अगर हम इसे अपने विद्यालय के मंच पर करेंगे तो बहुत मज़ा, आएगा। इसके लिए सबसे पहले हम ऐसे पात्रों के लिए उपयुक्त बच्चों का चयन करेंगे, फिर उन्हें उनके संवाद बता देंगे और अभिनय का अभ्यास प्रारंभ करवाएँगे। कथा आगे बढ़ाने और निर्देशन हेतु एक संवादवाचक का भी चयन करेंगे। नाटक हेतु जरूरी सामान, कुर्सी, पलंग, गिलास, पंखा इत्यादि का भी इंतजाम करेंगे। पात्रों की वेशभूषा यहाँ उचित प्रस्तुत की गई है।

उसमें किसी बदलाव की आवश्यकता नहीं है, परंतु हाँ! हम अंत में आए मामाजी के साथ उनके बच्चों और मामी को भी दिखा सकते हैं और तब कहानी का मुख्य पात्र अपनी पत्नी से कह सकता है कि अभी दो लोगों के आने से तुम्हारा सिर दर्द बढ़ गया था और अब चार लोग आ गए हैं तो तुम बिल्कुल स्वस्थ हो गई और तब उनकी पत्नी कहेगी – खबरदार ! यदि मेरे मायके वालों के खिलाफ कुछ बोला तो ! अब जाओ उनके अच्छे भोजन का प्रबंध करो।

(ख) अब आपको अपने – अपने समूह में इस एकांकी को प्रस्तुत करने की तैयारी करनी है। इसके लिए आपको यह सोचना है कि कौन किस पात्र का अभिनय करेगा। आपके शिक्षक आपको तैयारी के बाद अभिनय के लिए निर्धारित समय देंगे (जैसे 10 मिनट या 15 मिनट) । आपको इतने ही समय में एकांकी प्रस्तुत करनी है। बारी-बारी से प्रत्येक समूह एकांकी प्रस्तुत करेगा ।
उत्तर:
छात्र स्वयं करेंगे।

भाषा की बात

“सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो।”
” चारों तरफ दीवारें तप रही हैं ।”
“यह तो हमारा ही भाग्य है कि चने की तरह भाड़ में भुनते रहते हैं ।”
उपर्युक्त वाक्यों में रेखांकित शब्द गरमी की प्रचंडता को दर्शा रहे हैं कि तापमान अत्यधिक है।
एकांकी में इस प्रकार के और भी प्रयोग हुए हैं जहाँ शब्दों के माध्यम से विशेष प्रभाव उत्पन्न किया गया है, उन प्रयोगों को छाँटकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए ।
उत्तर:
कितना भयंकर है ! मकान है कि भट्ठी !
जैसे साँस बंद हो जाएगी।
कब तक इस जेलखाने में सड़ना होगा ?
गरमी के मारे मर रही हूँ।


गरीबों की तो मौत है।
तमाम शरीर मारे गरमी के उबल उठा है।
कपड़े तो ऐसे हो गए कि निचोड़ लो।


प्राण सूखे जा रहे हैं।


पसीने से भीग गया।
कारोबार सब चौपट हो गया।
बिस्तर भी पसीने से भीग गया।
लाखों के आदमी खाक में मिल गए।


माल मसाला तो अंटी में है न?
सोते-सोते हाथ-पैर सुन्न हो जाते थे


पहले आत्मा, फिर परमात्मा ।
तबीयत अब शांत हुई है।

मुहावरे



“आज दो साल से दिन-रात एक करके ढूँढ़ रहा हूँ ।”
“लाखों के आदमी खाक मिल गए।”

उपर्युक्त वाक्यों में रेखांकित वाक्यांश ‘रात-दिन एक करना’ तथा ‘खाक में मिलना’ मुहावरों का प्रायोगिक रूप है। ये वाक्य में एक विशेष प्रभाव उत्पन्न कर रहे हैं। एकांकी में आए अन्य मुहावरों की पहचान करके लिखिए और उनके अर्थ समझते हुए उनका अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए ।
उत्तर:
साँस बंद हो जाएगी – मुहावरा
अर्थ – साँस लेने में कठिनाई होना ।
वाक्य – बहुत घुटन है इस कमरे में मेरी तो साँसे बंद हो रही हैं।
गरीबों की तो मौत है- कहावत
अर्थ – गरीबों को हमेशा परेशानी झेलनी पड़ती है।
वाक्य – चाहे कितना ही विकास कर लो परंतु गरीबों पर किसी का ध्यान नहीं जाता। गरीबों की तो हर पल मौत है।
प्राण सूखे जा रहे हैं- मुहावरा
अर्थ – बहुत डर जाना।
वाक्य – शेर को सामने देखकर मेरे तो प्राण सूख गए।
गरमी के मारे उबल उठना- मुहावरा
अर्थ – परेशान होना ।
वाक्य – आज की गर्मी ने तो सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए, मैं तो गर्मी के मारे उबल उठा हूँ।
चौपट होना – मुहावरा
अर्थ – नष्ट होना।
वाक्य – इस बरसात में तो मेरी सारी फसल चौपट हो गई।
हाथ-पैर सुन्न होना— मुहावरा
अर्थ – घबरा जाना।
वाक्य – घने जंगलों से गुजरते हुए मेरे हाथ-पैर सुन्न हो रहे थे।
शांत होना – मुहावरा
अर्थ – धैर्य रखना।
वाक्य – जल्दबाजी से काम खराब होते हैं हमें शांत होकर कार्य करना चाहिए ।
अर्थ – पहले आत्मा, फिर परमात्मा- कहावत
वाक्य – पहले अपना ध्यान करना फिर दूसरों का ।
अर्थ – मैं पहले अपना कार्य समाप्त कर लूँ फिर तुम्हारा देखूँगी क्योंकि पहले आत्मा, फिर परमात्मा।
धुन सवार होना – मुहावरा
अर्थ – किसी बात के पीछे पड़ जाना ।
वाक्य – रोहित के सिर पर तो नई कार लेने की धुन सवार हो गई है अब वह लेकर ही मानेगा।
अपनी हाँकना- मुहावरा
अर्थ – अपनी ही बात कहना।
वाक्य – तुम केवल अपनी ही हाँकते रहते हो, कभी दूसरों की भी सुन लिया करो ।
सिर फटना – मुहावरा
अर्थ – मानसिक तनाव।
वाक्य – पूरा घर फैला देखकर तो मेरा सिर फटने लग गया।

बात पर बल देना



• “वह तो कहो, मैं भी ढूँढ़कर ही रहा ।”
उपर्युक्त वाक्य से रेखांकित शब्द ‘ही’ हटाकर पढ़िए-
“वह तो कहो, मैं भी ढूँढ़कर रहा”

(क) दो-दो के जोड़े में चर्चा कीजिए कि वाक्य में ‘ही’ के प्रयोग से किस बात को बल मिल रहा था और ‘ही’ हटा देने से क्या कमी आई ?
उत्तर:
‘ही’ के प्रयोग से किसी भी बात को बल मिलता है।



(ख) नीचे लिखे वाक्यों में ऐसे स्थान पर ‘ही’ का प्रयोग कीजिए कि वे सामने लिखा अर्थ देने लगे-

उत्तर:
1. विश्वनाथ के अतिथि ही यहाँ रुकेंगे और किसी के अतिथि नहीं।
2. विश्वनाथ के अतिथि ही यहाँ रुकेंगे यहाँ के अतिरिक्त और कहीं नहीं।
3. विश्वनाथ के अतिथि ही यहाँ रुकेंगे यहाँ रुकना निश्चित है।

• “तुम नहाने तो जाओ।”,
उपर्युक्त वाक्य में ‘तो’ का स्थान बदलकर अर्थ में आए परिवर्तन पर ध्यान दें-
” तुम तो नहाने जाओ।”
“तुम नहाने जाओ तो ।”
‘ही’ और ‘तो’ के ऐसे और प्रयोग करके वाक्य बनाइए।

उत्तर:
‘ही’ के प्रयोग-

1. मैं तुमसे कह रहा हूँ
मैं तुमसे ही कह रहा हूँ

2. रमेश ने गलत कहा है।
रमेश ने गलत ही कहा है।

3. तुम चले जाओ अब
तुम चले ही जाओ अब

‘तो’ के प्रयोग-

1. मैं फिल्म जरूर देखूँगा ।
मैं तो फिल्म जरूर देखूँगा ।

2. बच्चे शरारती होते हैं।
बच्चे तो शरारती होते हैं।

3. गीता घूमने अवश्य चलेगी ।
गीता तो घूमने अवश्य चलेगी।

पाठ से आगे

प्रश्न-अभ्यास आपकी बात
(पृष्ठ 123-125)

(क) “ रेवती – ये लोग कौन हैं ? जान-पहचान के तो मालूम नहीं पड़ते।
विश्वनाथ-क्या पूछ लूँ? दो-तीन बार पूछा, ठीक-ठीक उत्तर ही नहीं देते।”
उपर्युक्त संवाद से पता चलता है कि विश्वनाथ दुविधा की स्थिति में है। क्या आपके सामने कभी कोई ऐसी दुविधापूर्ण स्थिति आई है जब आपको यह समझने में समय लगा हो कि क्या सही है और क्या गलत? अपने अनुभव साझा कीजिए ।
उत्तर:
हाँ! मेरे सामने एक बार ऐसी स्थिति आई थी, कि मैं समझ नहीं पा रहा था कि क्या करूँ? प्रायः ऐसी स्थिति तब आती है जब हमारे सामने दो विकल्प हो और हमें किसी एक को चुनना हो । क्योंकि ऐसी परिस्थितियों में हम तय नहीं कर पाते कि क्या उचित है और क्या अनुचित ? ऐसा ही एक बार तब हुआ जब पापा का तबादला दूसरे शहर में हुआ।

उस समय माँ और छोटी बहन पापा के साथ दूसरे शहर जाने को तैयार थे परंतु मैं समझ नहीं पा रहा था कि अपना स्कूल छोड़ें कि नहीं। क्योंकि स्कूल में और मेरे पड़ोस में, बहुत सारे मित्र थे, तब पापा ने सुझाव दिया कि मैं पास में ही रहने वाली अपनी मौसी के घर रुककर पढ़ाई पूरी कर लूँ। पहले तो मुझे यह उचित लगा परंतु अगले ही पल माँ-बाप की याद सताने लगी। दो दिन तक मैं मित्रों और माता-पिता के बीच निर्णय लेने में असमर्थ रहा; परंतु तीसरे दिन मैंने तुरंत निर्णय लिया और माँ-बाप के साथ जाने को तैयार हुआ ।

(ख) एकांकी से ऐसा लगता है कि नन्हेमल और बाबूलाल सगे संबंधी ही नहीं, अच्छे मित्र भी हैं। आपके अच्छे मित्र कौन-कौन हैं? वे आपको क्यों प्रिय हैं ?
उत्तर:
मेरा अच्छा मित्र मेरे पड़ोस में रहने वाला राहुल है। वैसे तो स्कूल में भी मेरे बहुत मित्र हैं और पड़ोस में भी। मैं सबके साथ खेलता हूँ परंतु उन सबमें मेरा सबसे अच्छा मित्र ‘राहुल’ ही है क्योंकि वह हमेशा मेरा साथ देता है और गलत बात पर मुझे टोकता भी है। वह पढ़ाई में भी मेरी सहायता करता है। वह समय पर काम पूरा करने के लिए मुझे प्रेरित भी करता है। जब भी मैं परेशान होता हूँ तो वह मुझे हँसाता है और परेशानी से बाहर निकलने में मदद करता है।

(ग) आप अपने किसी संबंधी या मित्र के घर जाने से पहले क्या – क्या तैयारी करते हैं?
उत्तर:
जब हम अपने मित्र या संबंधी के घर जाते हैं, तो सबसे पहले उसे फोन करके सूचित कर देते हैं कि हम आ रहे हैं क्योंकि क्या पता उसे ही उस दिन कोई काम हो। इस प्रकार उसे और हमें दोनों को सुविधा रहती है और वह भी आने वाले के लिए तैयार रहता है। फिर हम अपने मित्र अथवा संबंधी के लिए फल, मिठाई इत्यादि उपहार स्वरूप लेकर जाते हैं।

(घ) विश्वनाथ के पड़ोसी उनका किसी प्रकार से भी सहयोग नहीं करते हैं। आप अपने पड़ोसियों का किस प्रकार से सहयोग करते हैं?
उत्तर:
हम अपने पड़ोसी के साथ सदैव मिलकर रहते हैं। हमारे पड़ोसी भी हमारे सुख-दुख में शामिल होते हैं। हम अक्सर शाम को साथ बैठकर बातें करते हैं। यदि कभी घर में किसी वस्तु की आवश्यकता अचानक से पड़ जाए और उस समय लाना संभव न हो तो हमारे पड़ोसी हमारी मदद करते हैं। कभी-कभी माँ-बाप को कहीं बाहर जरूरी काम से जाना पड़ जाए तो हम अपने पड़ोसी के घर रुक जाते हैं और वहाँ आँटी हमारा बहुत ध्यान रखती है। हम त्योहारों पर भी एक-दूसरे को शुभकामना देते हैं और मिलकर त्योहार मनाते हैं। हम अपने पड़ोसी से और हमारे पड़ोसी हमसे, हम दोनों ही एक-दूसरे से खुश तथा संतुष्ट हैं।

(ङ) नन्हेमल और बाबूलाल का व्यवहार सामान्य अतिथियों जैसा नहीं है। आपके अनुसार सामान्य अतिथियों का व्यवहार कैसा होना चाहिए?
उत्तर:
(ङ) नन्हेमल और बाबूलाल का व्यवहार सामान्य अतिथियों जैसा नहीं था, क्योंकि वे दोनों पहली बार विश्वनाथ के घर आए थे और बिना किसी यकीन के उसके मेहमान बनने लगे। उन्होंने यह जानना भी जरूरी नहीं समझा कि वे सही स्थान और सही व्यक्ति के पास आए भी हैं या नहीं। ये देखकर कि मेजबान की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है और वहाँ ठहरने का उपयुक्त स्थान भी नहीं है फिर भी वे दोनों जबरदस्ती के मेहमान बनकर घरवालों को परेशान कर रहे थे। ऐसी हरकतें एक अच्छे मेहमान को शोभा नहीं देती। हमें मेहमान बनकर जाना चाहिए, बोझ बनकर नहीं।

सावधानी और सुरक्षा

(क) विश्वनाथ ने नन्हेमल और बाबूलाल से उनका परिचय नहीं पूछा और उन्हें घर के भीतर ले आए। यदि आप उनके स्थान पर होते तो क्या करते ?
उत्तर:
यदि हम विश्वनाथ के स्थान पर होते तो कभी भी अपने घर में ऐसे व्यक्तियों को घुसने नहीं देते जिन्हें हम जानते ना हो, क्योंकि आजकल जमाना सही नहीं है। ऐसे ही किसी का घर में आना सुरक्षा की दृष्टि से खतरनाक हो सकता है। इसलिए मैं पहले दरवाजे पर ही उनका नाम और पहचान पूछता और स्वयं से क्या संबंध है? किसने उन्हें भेजा है और किससे उन्हें मिलना है? यह सब जानने के बाद ही यदि उचित लगता तो घर में प्रवेश की इजाजत देता ।

(ख) आपके माता-पिता या अभिभावक की अनुपस्थिति में यदि कोई अपरिचित व्यक्ति आए तो आप क्या-क्या सावधानियाँ बरतेंगे ?
उत्तर:
हमारे माता-पिता की अनुपस्थिति में यदि कोई अपरिचित आए तो हम उन्हें कभी भी घर में आने की इजाजत नहीं देंगे। हम यह नहीं सोचेंगे कि आने वाले को बुरा लग रहा है या नहीं, बल्कि हम इस बात का ध्यान रखेंगे कि इन्हें घर में घुसा कर कहीं अनहोनी ना हो जाए। इस कारण हम उनसे आदरपूर्वक कहेंगे कि कृपया आप बाद में आएँ जब माता-पिता घर वापस आ जाएँ और हम घर का दरवाजा बंद कर लेंगे।

सृजन



(क) आपने यह एकांकी पढ़ी। इस एकांकी में एक कहानी कही गई है। उस कहानी को अपने शब्दों में लिखिए । (जैसे- एक दिन मेरे घर में मेहमान आ गए…)
उत्तर:
एक दिन मेरे घर में मेहमान आ गए। मैं उन्हें पहचान नहीं पा रहा था, परंतु उन्होंने मुझे पूछने का अवसर दिए बिना घर में कदम रख दिया। मैं कुछ समझ नहीं पाया। पत्नी ने अलग बुलाकर पूछा कि कौन हैं? मैंने कंधे उचकाकर पूछा पता नहीं, जानने की कोशिश कर रहा हूँ पर ठीक से कुछ स्पष्ट नहीं हो पा रहा। चलो फिर से पूछता हूँ।

मैंने दो-तीन बार प्रयास किया, परंतु उन्होंने स्पष्ट उत्तर नहीं दिया और अपने पानी पीने, भोजन करने और नहाने की बात मुझसे करने लगे। भोजन की बात पर पत्नी नाराज हो गई और सिर दर्द की बात कहकर भोजन बनाने से मना कर दिया। मैंने बाहर से लाने की बात कही तो भी पैसा खर्च करने से मना कर दिया।

बाद में पूछने पर पता चला कि वे दोनों गलत घर में आ पहुँचे हैं। उन्हें तो दूसरी गली में कविराज वैद्य के घर जाना था। वे दोनों क्षमा माँगकर वहाँ से चले गए। मैंने और पत्नी ने राहत की साँस ली। तभी मेरी पत्नी का भाई मेहमान बनकर आ गया और सिर दर्द से परेशान पत्नी का दर्द मिनटों में छू-मंतर हो गया तथा वह खुशी से चहक उठी, मिठाइयाँ मँगवाकर भाई के लिए खाना बनाने चल दी। मैं इस बदलते रूप को देखकर हैरान था ।

गरमी का प्रकोप

प्रश्न- “तमाम शरीर मारे गरमी के उबल उठा है।”
एकांकी में भीषण गरमी का वर्णन किया गया है। आप गरमी के प्रकोप से बचने के लिए क्या-क्या सावधानी बरतेंगे? पाँच-पाँच के समूह में चर्चा करें। मुख्य बिंदुओं को चार्ट पेपर पर लिखकर बुलेटिन बोर्ड पर लगाएँ और इन्हें व्यवहार में लाएँ ।
उत्तर:
हम गर्मी से बचने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखेंगे-

1. पानी ज्यादा पिएँगे।

2. बाहर धूप में नहीं जाएँगे ।

3. सूती कपड़े पहनेंगे ।

4. रोज नहाएँगे ।

5. नींबू पानी का सेवन करेंगे।

तार से संदेश



प्रश्न- ” क्या मेरा तार नहीं मिला?”
रेवती के भाई ने अपने आने की सूचना तार द्वारा भेजी थी। ‘तार’ संदेश भेजने का एक माध्यम था। जिसके द्वारा शीघ्रता से किसी के पास संदेश भेजा जा सकता था, किंतु अब इसका प्रचलन नहीं है।

टेलीग्राफ

किसी भौतिक वस्तु के विनिमय के बिना ही संदेश को दूर तक संप्रेषित करना टेलीग्राफी कहलाता है। विद्युत धारा की सहायता से, पूर्व निर्धारित संकेतों द्वारा, संवाद एवं समाचारों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजनेवाला तथा प्राप्त करने वाला यंत्र तारयंत्र (टेलीग्राफ) कहलाता है। वर्तमान में यह प्रौद्योगिकी अप्रचलित हो गई है।

(क) तार भेजने के आधार पर अनुमान लगाएँ कि यह एकांकी लगभग कितने वर्ष पहले लिखी गई होगी?
उत्तर:
1850 से शुरू हुआ और 1902 तक तार भेजने का प्रचलन था यह एकांकी इन्हीं वर्षों में लिखी गयी होगी।

(ख) आजकल संदेश भेजने के कौन-कौन से साधन सुलभ हैं?
उत्तर:
आजकल, संदेश – ईमेल, वॉटसअप, टेलीग्राम, फेसबुक, ट्वीटर, एस.एम.एस तथा वीडियो कॉन्फ्रेसिंग द्वारा भेजे जाते हैं।



(ग) आप किसी को संदेश भेजने के लिए किस माध्यम का सर्वाधिक उपयोग करते हैं?
उत्तर:
हम वॉटसअप तथा ईमेल के द्वारा ज्यादातर संदेश भेजते हैं।

(घ) अपने किसी प्रिय व्यक्ति को एक पत्र लिखकर भारतीय डाक द्वारा भेजिए ।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

नाप तौल और मुद्राएँ



“जबकि नत्थामल के यहाँ साढ़े नौ आने गज बिक रही थी ।”

उपर्युक्त पंक्ति के रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए । रेखांकित शब्द ‘साढ़े नौ’, ‘आने’, ‘ग़ज’ में ‘साढ़े नौ’ भारतीय भाषा में अंतरराष्ट्रीय अंक (9.5) को दर्शा रहा है तो वहीं ‘आने’ शब्द भारतीय मुद्रा और ‘गज’ शब्द लंबाई नापने का मापक है।

(क) पता लगाइए कि एक रुपये में कितने आने होते हैं?
उत्तर:
एक रुपये में 16 आने होते हैं।

(ख) चार आने में कितने पैसे होते हैं?
उत्तर:
चार आने में 25 पैसे होते हैं।

(ग) आपके आस-पास गज शब्द का प्रयोग किस संदर्भ में किया जाता है? पता लगाइए और लिखिए।
उत्तर:
गज का प्रयोग – कपड़ा और जमीन नापने के लिए किया जाता है।

(घ) बताइए कि एक गज में कितनी फीट होती हैं ?
उत्तर:
एक गज में 3 फीट होते हैं।

झरोखे से

कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का जीवन सादगी भरा था, परंतु वे अपने आतिथ्य के लिए जाने जाते थे। उनके घर में कोई अतिथि आ जाए तो वे उसके सत्कार के लिए जी-जान से जुट जाते थे। महादेवी वर्मा की पुस्तक पथ के साथी से निराला के आतिथ्य भाव का एक छोटा सा अंश पढ़िए-

…….ऐसे अवसरों की कमी नहीं जब वे अकस्मात पहुँच कर कहने लगे…… “मेरे इक्के पर कुछ लकड़ियाँ, थोड़ा घी आदि रखवा दो। अतिथि आए हैं, घर में सामान नहीं है।”

उनके अतिथि यहाँ भोजन करने आ जावें, सुनकर उनकी दृष्टि में बालकों जैसा विस्मय छलक आता है। जो अपना घर समझकर आए हैं, उनसे यह कैसे कहा जाए कि उन्हें भोजन के लिए दूसरे घर जाना होगा।

भोजन बनाने से लेकर जूठे बर्तन माँजने तक का काम वे अपने अतिथि देवता के लिए सहर्ष करते हैं। तैंतीस कोटि देवताओं के देश में इस वर्ग के देवताओं की संख्या कम नहीं, पर आधुनिक युग ने उनकी पूजा विधि में बहुत कुछ सुधार कर लिया है। अब अतिथि-पूजा के अवसर वैसे कम ही आते हैं और यदि आ भी पड़े तो देवता के और अभिषेक, शृंगार आदि संस्कार बेयरा, नौकर आदि ही संपन्न करा देते हैं। पुजारी गृहपति को तो भोग लगाने की मेज पर उपस्थित रहने भर का कर्तव्य सँभालना पड़ता है। कुछ देवता इस कर्तव्य से भी उसे मुक्ति दे देते हैं।

ऐसे युग में आतिथ्य की दृष्टि से निराला जी में वही पुरातन संस्कार है जो इस देश के ग्रामीण किसान में मिलता है।

उनके भाव की अतल गहराई और अबाध वेग भी आधुनिक सभ्यता के छिछले और बँधे भाव-व्यापार से भिन्न हैं।

साझी समझ

प्रश्न- भारत में ‘अतिथि देवो भव’ की परंपरा रही है। आपके घर जब अतिथि आते हैं तो आप उनका अभिवादन कैसे करते हैं, अपनी भाषा में बताइए और अपने सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए कि अतिथियों को आप अपने राज्य, क्षेत्र का कौन-सा पारंपरिक व्यंजन खिलाना चाहते हैं।
उत्तर:
जब हमारे घर अतिथि आते हैं तो हम हाथ जोड़कर उनका अभिवादन करते हैं। उन्हें पहले पानी पिलाते हैं फिर चाय के साथ नमकीन, बिस्कुट इत्यादि रखते हैं। यदि अतिथि भोजन के समय आया है तो उसे दो सब्जियों के साथ भोजन करवाते हैं और मीठा भी खिलाते हैं। उनका पूरा सम्मान करते हैं। उनके साथ बैठकर बातें करते हैं और वक्त व्यतीत करते हैं। जब अतिथि वापस जाते हैं तो उन्हें- फिर आइएगा कहकर अपनत्व का एहसास करवाते हैं।

खोजबीन के लिए

प्रश्न- एक एकांकी में ‘आने’, ‘गज’ और ‘तार’ शब्द आए हैं। इनके विषय में विस्तार से जानकारी इकट्ठी कीजिए। इसके लिए आप अपने अभिभावक, अध्यापक, पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं।
उत्तर:
मुख्य बातें:-
आने:-
इकाई: आने (या आना)
मूल्य: 1/16 रुपये
विभाजनः 4 पैसे या 12 पाई
दशमलव प्रणाली में: 61/4 पैसे
उपयोग: ब्रिटिश भारत में इसका उपयोग किया जाता था। यह एक मुद्रा इकाई थी।
गज:- यह – भूमि मापने की एक पारंपरिक इकाई है। यह इकाई मुख्य रूप से उत्तरी भारत में, विशेषकर पंजाब, हरियाणा और दिल्ली जैसे राज्यों में उपयोग में लाई जाती है।
मुख्य बातें-
मापः 1 गज 9 वर्ग फुट ।
उपयोग: भूमि और संपत्ति की माप के लिए।
क्षेत्र: उत्तरी भारत में ।
अन्य नामः वर्ग गज ।
ऐतिहासिक महत्व : मुगल काल से उपयोग में। आकारः एक वर्ग गज 3 फुट × 3 फुट के आकार के बराबर
तारः संदेश भेजने वाले तार, जिसे टेलीग्राम भी कहा जाता है, एक त्वरित संदेश सेवा थी, जो विद्युत संकेतों का उपयोग करके एक स्थान से दूसरे स्थान तक संदेश भेजती थी। यह 19वीं और 20वीं सदी में लोकप्रिय था, लेकिन अब इसका उपयोग बहुत कम होता है अर्थात ना के बराबर ।

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