मंगलवार, 9 जनवरी 2024

NCERT Solutions for Class 8 Hindi Vasant Chapter 13 - बाज और साँप

 NCERT Solutions for Class 8 Hindi Vasant Chapter 13 - बाज और साँप

 

1. घायल होने के बाद भी बाज ने यह क्यों कहा, "मुझे कोई शिकायत नहीं है।" विचार प्रकट कीजिए।

उत्तर: घायल होने के बाद भी बाज ने यह कहा कि- “मुझे कोई शिकायत नहीं है। उसने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि वह कभी भी समझौते की जीवन शैली को अपनाना नहीं चाहता था। वह अपने अधिकारों के लिए लड़ने में विश्वास रखता था। उसने अपनी जिंदगी को भरपूर तरीके से जिया। वह असीम आकाश में जी भरकर उड़ान भर चुका था। जब तक उसके शरीर में ताकत रही तब तक ऐसी कोई खुशी नहीं बची जिसे उसने जिया न हो। वह अपनी जिंदगी से पूरी तरह संतुष्ट था।


2. बाज जिंदगी भर आकाश में ही उड़ता रहा फिर घायल होने के बाद भी वह उड़ना क्यों चाहता था?

उत्तर: बाज बहुत ही वीर और साहसी प्राणी था। उसने आजीवन अपनी क्षमताओं का सुख भोगा था। परन्तु अपने अंतिम समय में वह दुर्गन्धपूर्ण वातावरण में लाचार होकर अपने प्राण नहीं त्यागना चाहता था। वह एक अंतिम बार उड़ान भरकर, जीवन की अंतिम घड़ियों में आनंद उठाना चाहता था।

 

3. साँप उड़ने की इच्छा को मूर्खतापूर्ण मानता था। फिर उसने उड़ने की कोशिश क्यों की?

उत्तर: साँप ने अपना जीवन उस गुफा के दुर्गन्धपूर्ण वातावरण में बिताया था। उसने कभी भी स्वछंदता का सुख नहीं भोगा था। लेकिन बाज अधमरा होते हुए भी आकाश में उड़ना चाहता था। यह देखकर सांप के मन में उथल-पुथल मच गई। उसने सोचा की आकाश में ऐसी क्या विशेषता है जो बाज घायल होने के बावजूद भी उड़ने को बेचैन था। अपनी इस दुविधा को शांत करने की लिए और आकाश का रहस्य जानने के लिए सांप ने उड़ने की कोशिश की थी।

 

4. बाज के लिए लहरों ने गीत क्यों गाया था?

उत्तर: बाज बहुत ही साहसी प्राणी था। वह हर परिस्थिति का सामना वीरता से करता था। शारीरिक रूप से अक्षम होने के बावजूद उसने हार नहीं मानी। जीवन के अंतिम पलों का आनंद उठाने के लिए उसने अपनी जान की बाज़ी लगा दी। प्रकृति ने उसकी वीरता पर श्रद्धांजलि अर्पित की। लहरों ने भी बाज की वीरतापूर्ण जीवन की प्रशंसा के गीत गाए।

 

5. घायल बाज को देखकर साँप खुश क्यों हुआ होगा?

उत्तर: साँप एक कायर प्राणी था। वह आजीवन अपनी सुरक्षा और सुख को महत्व देता रहा। एक दिन अचानक उसकी गुफा के पास एक घायल बाज आ गिरा तो वह डर गया। उसे चिंता हुई की बाज उसे कोई हानि न पहुँचाए। परंतु जब उसने बाज को घायल और अधमरा पाया तो उसका डर निकल गया। अपने शत्रु को लाचार पाकर उसे सुरक्षित महसूस हुआ और वह खुश हो गया।

 

कहानी से आगे

1. कहानी में से वे पंक्तियाँ चुनकर लिखिए जिनसे स्वतंत्रता की प्रेरणा मिलती हो।

उत्तर: कहानी की स्वतंत्रता से संबंधित पंक्तियाँ:

1. जब तक शरीर में ताकत रही, कोई सुख ऐसा नहीं बचा जिसे न भोगा हो। दूर-दूर तक उड़ानें भरी हैं, आकाश की असीम ऊँचाइयों को अपने पंखों से नाप आया हूँ।

2. आह! काश, मैं सिर्फ़ एक बार आकाश में उड़ पाता।

3. पर वह समय दूर नहीं है, जब तुम्हारे खून की एक-एक बूंद ज़िंदगी के अंधेरे में प्रकाश फैलाएगी और साहसी, बहादुर दिलों में स्वतंत्रता और प्रकाश के लिए प्रेम पैदा करेगी।

4. यदि तुम्हें स्वतंत्रता इतनी प्यारी है तो इस चटृान के किनारे से ऊपर क्यों नहीं उड़ जाने की कोशिश करते। हो सकता है कि तुम्हारे पैरों में अभी इतनी ताकत बाकी हो कि तुम आकाश में उड़ सको। कोशिश करने में क्या हर्ज है?

5. वह दूने उत्साह से अपने घायल शरीर को घसीटता हुआ चट्टान के किनारे तक खींच लाया।

 

2. लहरों का गीत सुनने के बाद साँप ने क्या सोचा होगा? क्या उसने फिर से उड़ने की कोशिश की होगी? अपनी कल्पना से आगे की कहानी पूरी कीजिए |
उत्तर – लहरों का गीत सुनने के बाद साँप ने सोचा होगा कि बाज साहसी है घायल होने के बाद भी उसने उड़ने की कोशिश की। क्योंकि बाज आकाश में उड़ने वाला प्राणी है उसके लिए आकाश ही खूबसूरत जगह है पर मै उड़ने वाला प्राणी नहीं हूँ इसलिए मै जहाँ हूँ वही मेरे लिए ठीक है बाज की बातों में आकर आकाश में उड़ने का आनंद लेने के लिए कूदा था। पर ईश्वर की कृपा से मरते-मरते बचा हूँ। मुझे दोबारा उड़ने की कोशिश करके खुद को मुसीबत में नही डालनी चाहिए।

 

3. क्या पक्षियों को उड़ते समय सचमुच आनंद का अनुभव होता होगा या स्वाभाविक कार्य में आनंद का अनुभव होता ही नहीं? विचार प्रकट कीजिए।
उत्तर – पक्षियों को उड़ते समय आनंद का अनुभव होता होगा क्योंकि ये उनका स्वाभाविक कार्य है । उनकी प्रवृत्ति है उड़ना, इसलिए उन्हें आसमान में अपने पंख फैलाकर उड़ान भरना अच्छा लगता होगा।

 

4. मानव ने भी हमेशा पक्षियों की तरह उड़ने की इच्छा की है। आज मनुष्य उड़ने की इच्छा किन साधनों से पूरी करता है।

उत्तर: मानव ने आदिकाल से ही पक्षियों की तरह उड़ने की इच्छा को अपने मन में रखा है। परंतु शारीरिक असमर्थता के कारण से उड़ नहीं पा रहा था, जिसका नतीजा यह निकला कि मानव ने हवाई जहाज़ का आविष्कार कर दिखाया। आज के मनुष्य ने अपने उड़ने की इच्छा को पूरा हवाई जहाज़, हेलीकॉप्टर, गैस-बैलून इत्यादि से करता है।

 

अनुमान और कल्पना

  • यदि इस कहानी के पात्र बाज और साँप न होकर कोई और होते तब कहानी कैसी होती? अपनी कल्पना से लिखिए।

 

उत्तर:

तोता और बैल

बैल को खूटे पर बँधा हुआ देखकर तोता हँसा-“भाई तुम्हारे तो ठाठ हैं। दिन भर हल खींचना पड़ता है। किसान के डण्डे भी खाए। तब जाकर तुम्हें चारा मिला। दिन की चिलचिलाती धूप भी तुम्हें अपनी पीठ पर झेलनी पड़ी।”

बैल चारा खाते-खाते रुका-“तुम्हारी तरह दिन भर चार दानों के लिए मीलों-मील मरमार तो नहीं करनी पड़ती। घर लौटने पर इतना तो तय रहता है कि पेट भरने के लिए पूरा चारा मिल जाएगा। फिर जो चारा खिलाएगा, वह काम तो लेगा ही। बिना काम किये खाना भी तो पाप है। तुम कोई काम नहीं करते। चुपके से किसी के मक्का के खेत में घुस जाते हो। किसी के बाग में चोरी-छिपे जाकर फल कुतरने लगते हो।”

इस तरह खाने का अपना ही आनन्द है। तरह-तरह के बढ़िया फल खाने को मिल जाते हैं। अच्छे फल ढूँढ़ने के लिए भी तो कर्म करना पड़ता है। हमें जो आज़ादी मिली हुई है, उसका तो मज़ा ही कुछ अलग है। हम अपनी मर्जी के मालिक हैं। तुम अपनी मर्जी से कहीं भी नहीं जा सकते। अपनी मर्जी का खा भी नहीं सकते। तुम्हारे मालिक जो चने की बढ़िया दाल खाते हैं, हम उनके आँगन में जाकर कुछ दाने उसमें से खा लेते हैं। तुम्हारे आँगन में इस आम पर हर साल बढ़िया आम लगते हैं। तुमने कभी चखे भी नहीं होंगे। हमें देखिए-पके हुए आमों का आनन्द हम सबसे पहले उठाते हैं। तुम्हारे मालिक से भी पहले”-तोते ने आँखें मटका कर कहा।

बैल कहाँ चुप रहने वाला था। वह अपने थूथन को हिलाकर बोला-“ठण्ड और बारिश में मुझे अलग कोठरी में बाँध देते हैं। तुम्हें तो ठण्ड, बारिश और ओलों की मार झेलनी पड़ती है।”

अरे भाई! हम भी किसी मकान के कोने में जाकर दुबक जाते हैं। हमारा भी समय कट जाता है। दिक्कत तो सभी के साथ है। हमें शिकारी मार गिराते हैं। चिड़ीमार पकड़ कर पिंजरे में बंद कर लेते हैं। बाज भी झपट्टा मार कर हमें मार देता है। आज़ादी मिली है तो उसकी कुछ कीमत तो चुकानी पड़ेगी। आनन्द और आज़ादी कोई मुफ़्त में थोड़े ही मिलते हैं?” तोते ने अपनी बात को महत्त्व देते हुए कहा-“खुली हवा में साँस लेने का आनन्द ही कुछ और है।”

तुम सही कहते हो”-बैल ने सिर हिलाकर कहा-“परन्तु मेरा जीवन केवल मेरे लिए नहीं है। मैं जिस फसल को उगाने में मदद करता हूँ, उससे पूरे परिवार का पालन पोषण होता है। मेरा मालिक मुझे चारा खिलाने के बाद ही खाना खाता है। वह सुबह उठकर मुझे पहले चारा खिलाता है तब खुद कुछ खाता है। मेरा जीवन तुम्हारी तरह आज़ाद भले ही न हो, परन्तु एकदम निरर्थक भी नहीं है।”

तोते को बैल की बात सही लगी। वह बोला- “हम दोनों ही अपनी-अपनी जगह सही हैं। ईश्वर ने हमारा जीवन जैसा बनाया है, हमें वैसा ही जीवन जीना है। अच्छा चलता हूँ” कहकर तोता फुर्र से उड़ गया। बैल बहुत देर तक सिर उठाए आकाश की तरफ देखता रह गया।

 

भाषा की बात

8. कहानी में से अपनी पसंद के पाँच मुहावरे चुनकर उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए।

उत्तर:

1. भाँप लेना - बच्चों के चेहरे को देखकर माता जी ने परीक्षा का क्या नतीजा आया होगा यह भाँप लिया।

2. हिम्मत बाँधना - दोस्त के आने भर से ही दौड़  के लिए प्रतीक की हिम्मत बँधी।

3. अंतिम साँस गिनना - घायल चिड़िया को देखकर माता जी ने स्थिति भाँप ली वे कि वो अपनी अंतिम साँस गिन रही है।

4. मन में आशा जागना - माँ की बात ने मेरे मन में आशा जगा दी।

5. प्राण हथेली में रखना - स्वतन्त्रता सेनानी ने देशवासियों की जान बचाने के लिए अपने प्राणों को हथेली में रख दिया।

 

9. 'आरामदेह शब्द में देह प्रत्यय है। यहाँ देह देनेवाला के अर्थ में प्रयुक्त है। देनेवाला के अर्थ में दः, प्रदः, दाता', 'दाई आदि का प्रयोग भी होता है, जैसे-सुखद, सुखदाता, सुखदाई. सुखप्रद। उपर्युक्त समानार्थी प्रत्ययों को लेकर दो-दो शब्द बनाइए।

उत्तर:

प्रत्यय शब्द

द: - सुखद.दुखद

दाता - परामर्शदाता, सुखदाता

दाई - सुखदाई. दुखदाई

देह - विश्रामदेह, लाभदेह, आरामदेह

प्रद - लाभप्रद, हानिप्रद. शिक्षाप्रद

NCERT Class 8 Sanskrit Chapter 15 प्रहेलिकाः

NCERT Class 8 Sanskrit Chapter 15 प्रहेलिकाः

पाठ का परिचय (Introduction of the Lesson)
पहेलियाँ मनोरंजन का एक प्राचीन विधा (तरीका) है। ये लगभग संसार की सभी भाषाओं में उपलब्ध हैं। संस्कृत के कवियों ने इस परम्परा को अत्यन्त समृद्ध किया है। पहेलियाँ हमें आनन्द देने के साथ-साथ हमारी मानसिक व बौद्धिक प्रक्रिया को तीव्र बनाती हैं। इस पाठ में संस्कृत प्रहेलिका (पहेली) बूझने की परम्परा के कुछ रोचक उदाहरण प्रस्तुत किए गए हैं।

परियोजना-कार्यम्
मनोरञ्जनहीन व हास्यविहीन जीवन को नरक माना जा सकता है। पहेलियाँ मनोरञ्जन की प्राचीन विधा हैं। ये प्रायः विश्व की सारी भाषाओं में उपलब्ध हैं। संस्कृत के कवियों ने इस परम्परा को अत्यन्त समृद्ध किया है। पहेलियाँ जहाँ हमें आनन्द देती हैं, वही समझ-बूझ की हमारी मानसिक व बौद्धिक प्रक्रिया को तेज बनाती हैं। इस पाठ में संस्कृत प्रहेलिका (पहेली) बूझने की परम्परा के कुछ रोचक उदाहरण प्रस्तुत किए गए हैं। रोचकपूर्ण ढंग से ज्ञानवर्धक करने के लिए पहेलियाँ उत्तम साधन हैं।

शब्दार्थ-
हन्ति – मरता / ती है;

करिणाम् – हाथियों के;

कातरः – कायर;

सीमान्तिनीषु – नारियों में

अभूत् – हुआ;

बध्यते – जाना जाता है,

सञ्जधान मारा;

कंसज्जधान् – कंस को मारा;

शीतलवाहिनी – शीतलधारी वाली;

काशीतलवाहिनी – काशी की भूमि पर बहने वाली;

दारपोषणरताः – पत्नी के पोषण में लीन;

केदारपोषणरताः – खेत के कार्य में संलग्न;

बलवत्तम् – बलवान् को;

कम्बलवत्तम् – कम्बल वाले को

बाधते – बाधिक करता है;

वृक्षावासी – पेड़ों पर रहने वाला;

पक्षिराजः – पक्षियों का राजा;

त्रिनेत्रधारी – तीन नेत्रों वाला;

शूलपाणिः – त्रिशूलधारी;

त्वम् – त्वचा, छाल;

विभ्रत् – मरार हुआ;

विष्णुपदम् – मोक्ष;

तक्रम् – छाद, मठा;

शक्रस्य – इन्द्र का;

दुर्लभम् – कठिन।

 

मूलपाठः
कस्तूरी जायते कस्मात्?
को हन्ति करिणां कुलम्?
किं कुर्यात् कातरो युद्धे?
भृगात् सिंहः पलायते ॥1

अन्वयः
कस्तूरी कस्मात् जायते? कारिणां कुलं कः हन्ति? कातरः युद्ध किं कुर्यात् ? मृगात् सिंहः पलायते।

सरलार्थः
कस्तूरी किससे उत्पन्न होती हैं? हाथियों के कुल को कौन मरता है? कायर युद्ध में क्या करता है? ‘हिरण ‘शेर’, से भाग जाता है।’ (ये तीनों की क्रमशः उत्तर है।)

सीमन्तिनीषु का शान्ता?
राजा कोऽभूत् गुणोत्तमः?
विद्वदभिः का सदा वन्द्या?
अत्रैवोक्तं न बुध्यते॥2

अन्वयः
सीमन्तिनीषु का शान्ता? कः गुणोत्तमः राजा अभूत् ? विद्वद्भिः सदा का वन्द्या?

सरलार्थः
1. नारियों में कौन शान्त है? (सीता)
2. गुणों में उत्तम राजा कौन हुआ है? (राम)
3. विद्वानों द्वारा सदा कौन पूजी जाती है? (विद्या)
इन्हीं में कहा गया है, पता नहीं चल रहा है।

कं सञ्जधान कृष्णः?
का शीतलवाहिनी गङ्गा?
के दारपोषणरता:?
कं बलवन्तं न बाधते शीतम्॥3

अन्वयः
कृष्णः कं सज्जधान? का शीतलवाहिनी गङ्गा? के दारपोषणरता:? शीतं कं बलवन्तं न बाधते?

सरलार्थः
कृष्ण ने किसे मारा? (कंस को)
शीतलधारा वाणी गंगा कहाँ हैं? (काशी में)
स्त्री के पोषण में कौन लगे रहते हैं? (किसान)
किस बलवान् को सर्दी नहीं लगती? (कम्बल वाले को)

 

वृक्षाग्रवासी न च पक्षिराजः
त्रिनेत्रधारी न च शूलपाणिः।
त्वगवस्त्रधारी न च सिद्धयोगी
जल च विभ्रन्न घटो न मेघः।।4।।

अन्वयः
वृक्षाग्रवासी पक्षिराजः च न त्रिनेत्रधारी (किन्तु) शूलपाणि: च न । त्वग्वस्त्रधारी (परन्तु) सिद्धयोगी च न) जलं च बिभ्रत् न घटः न (च) मेघः।

सरलार्थः
वृक्ष पर रहता है लेकिन पक्षीराज (गरुड) नहीं है।
तीन नेत्रों वाला है लेकिन शिव नहीं है।
छाल के वस्त्र पहनता है लेकिन योगी नहीं है।
जल से भरा हुआ है फिर भी न घड़ा है और न बादल।
उत्तर है – नारियल

भोजनान्ते च किं पेयम्?
जयन्तः कस्य वै सुतः?
कथं विष्णुपदं प्रोक्तम्?
तक्रं शुक्रस्य दुर्ललभम्॥5

अन्वयः
भोजनान्ते किं पेयम् ? जयन्तः कस्य वैसुतः? विष्णुपदं कथं प्रोक्तम् ? तक्रं शुक्रस्य दुर्लभम्।

सरलार्थः
भोजन के अन्त में क्या पीना चाहिए? (छाछ)
जयन्त किसका पुत्र है? (इन्द्र का)
मोक्ष कैसा कहा गया है? (दुर्लभ)
मट्ठा दुर्लभ है इन्द्र के लिए।

 

NCERT Solutions for Class 8 Sanskrit Chapter 15 प्रहेलिकाः

अभ्यासः (Exercise)
प्रश्न 1.
श्लोकांशेषु रिक्तस्थानानि पूरयत-(श्लोकांशों में रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-)
(क) सीमन्तिनीषु का ……………………… राजा ……………………. गुणोत्तमः।
(ख) कं सञ्जघान ……………………. का ……………………. गङ्गा?
(ग) के ……………………. कं ……………………. न बाधते शीतम्।।
(घ) वृक्षाग्रवासी न च ……………………. न च शूलपाणिः।
उत्तरम्:
(क) सीमन्तिनीषु का शान्ता? राजा कोऽभूत् गुणोत्तम:?
(ख) कं सञ्जघान कृष्णः? का शीतलवाहिनी गङ्गा?
(ग) के दारपोषणरता:? कं बलवन्तं न बाधते शीतम्?
(घ) वृक्षाग्रवासी न च पक्षिराजः त्रिनेत्रधारी न च शूलपाणिः।

प्रश्न 2. श्लोकांशान् योजयत-(श्लोकांशों का मिलान कीजिए-)
उत्तरम्

किं कुर्यात् कातरो युद्धे                 मृगात् सिंहः पलायते

विद्वदभिः का सदा वन्द्या              अत्रैवोक्तं न बुध्यते

कं सञ्जधान कृष्णः                    का शीतलवाहिनी गङ्गा

कथं विष्णुपदं प्रोक्तम्?                 तक्रं शुक्रस्य दुर्ललभम्

प्रश्न 3. उपयुक्तकथनानां समक्षम् ‘आम्’ अनुपयुक्तकथनानां समक्षं ‘न’ इति लिखत-(उपयुक्त कथनों के सामने ‘आम्’ और अनुपयुक्त कथनों के सामने ‘न’ लिखिए-)
उत्तरम्:
(क) कातरो युद्धे युद्ध्यते। – न
(ख) कस्तूरी मृगात् जायते। – आम्
(ग) मृगात् सिंह: पलायते। – आम्
(घ) कंसः जघान कृष्णम्। – न
(ङ) तक्रं शक्रस्य दुर्लभम्। – आम्।
(च) जयन्तः कृष्णस्य पुत्रः। – न

प्रश्न: 4. संन्धिविच्छेदं पूरयत-(सन्धि विच्छेद पूरे कीजिए-)
(क) करिणां कुलम् = …………………… + …………………
(ख) कोऽभूत्     = ………………….. + ………………….
(ग) अत्रैवोक्तम्   = ………………….. + ………………….
(घ) वृक्षाग्रवासी   = ………………….. + ………………….
(ङ) त्वग्वस्त्रधारी = ………………….. + ………………….
(च) बिभ्रन्न
उत्तरम्:
(क) करिणां कुलम्      = करिणाम् +    कुलम्
(ख) कोऽभूत्           = क:      +    अभूत्
(ग) अत्रैवोक्तम्        = अत्र     +    एव   +    उक्तम्
(घ) वृक्षाग्रवासी        = वृक्ष     +    अग्रवासी
(ङ) त्वग्वस्त्रधारी       = त्वक्    +    वस्त्रधारी
(च) बिभ्रन्न           = बिभ्रत्   +   

प्रश्न 5. अधोलिखितानां पदानां लिहूं, विभक्तिं वचनञ्च लिखत-(निम्नलिखित पदों के लिङ्ग, विभक्ति और वचन लिखिए-)
उत्तरम्:

पदानि          लिंगम्          विभक्ति         वचनम्

करिणाम्         पुल्लिंगम्        षष्ठी           बहुवचनम्

कस्तूरी          स्त्रीलिंग         प्रथमा           एकवचनम्

युद्धे           नपुंसकलिंगम्     सप्तमी          एकवचनम्

सीमंतिनीषु       पुल्लिंगम्        सप्तमी          बहुवचनम्

बलवंतम्         नपुंसकलिंगम्     प्रथमा           एकवचनम्

शूलपाणी:        स्त्रीलिंग         प्रथमा           एकवचनम्

शक्रस्य          पुल्लिंगम        षष्ठी           एकवचनम्


प्रश्न 6. (अ) विलोमपदानि योजयत-(विलोम पदों को मिलाइए-)
उत्तरम्:
जायते        म्रियते
वीरः          कातरः
अशान्ता        शान्ता
मूर्खः          विद्वद्भि:
अत्रैव          तत्रैव
आगच्छति     पलायते

(आ) समानार्थकापदं चित्वा लिखत-(समानार्थक पद चुनकर लिखिए-)
(क) करिणाम् …………………………। (अश्वानाम् / गजानाम् / गर्दभानाम्)
(ख) अभूत् …………………………।    (अचलत् / अहसत् / अभवत्)
(ग) वन्द्या …………………………।   (वन्दनीया / स्मरणीया / कर्तनीया)
(घ) बुध्यते …………………………।   (लिख्यते / अवगम्यते / पठ्यते)
(ङ) घट: ………………………….।     (तडागः / नलः / कुम्भ:)
(च) सञ्जधान …………………………। (अमारयत् / अखादत् / अपिबत्)।
उत्तरम्:
(क) गजानाम्,
(ख) अभवत्,
(ग) वन्दनीया,
(घ) अवगम्यते,
(ङ) कुम्भः,
(च) अमारयत्।

प्रश्न 7. कोष्ठकान्तर्गतानां पदानामुपयुक्तविभक्तिप्रयोगेन अनुच्छेदं पूरयत-(कोष्ठक पदों में उपयुक्त विभक्ति का प्रयोग करके अनुच्छेद पूरा कीजिए-)
एकः काकः ………………… (आकाश) उड्डयमानः आसीत्। तृषार्तः सः ………………… (जल) अन्वेषणं करोति। तदा सः ………………… (घट) अल्पं ………………… (जल) पश्यति। सः ………………… (उपल) आनीय ………………… (घट) पातयति। जलं ………………… (घट) उपरि आगच्छति। ………………… (काक) सानन्दं जलं पीत्वा तृप्यति।
उत्तरम्:
आकाशे, जलस्य, घटम्, जलम्, उपलानि/उपलान्, घटे, घटात्, काकः।


सोमवार, 8 जनवरी 2024

CERT Solutions for Class 7 Hindi Chapter 19 आश्रम का अनुमानित व्यय

NCERT Solutions for Class 7 Hindi Chapter 19 आश्रम का अनुमानित व्यय

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास

लेखा-जोखा
1: हमारे यहाँ बहुत से काम लोग खुद नहीं करके किसी पेशेवर कारीगर से करवाते हैं। लेकिन गाँधी जी पेशेवर कारीगरों के उपयोग में आनेवाले औज़ार – छेनी, हथौड़े, बसूले क्यों खरीदना चाहते होंगे?

उत्तर : गाँधी जी के मन में आश्रम के प्रत्येक व्यक्ति को स्वावलंबी बनाने की बात रही होगी क्योंकि जिन औज़ारों का ज़िक्र किया गया है, वे बढ़ई के कार्य अर्थात्‌ लकड़ी का सामान बनाने के काम में आता है। गाँधी जी अहमदाबाद में एक आश्रम खोलने का प्रयास कर रहे थे। वे चाहते थे कि आश्रम में सारा काम आश्रम के लोग स्वयं ही करें। इसके लिए वह औज़ारों की एक सूची तैयार कर रहे थे। ताकि आश्रम में रहकर ही उसकी ज़रूरतों का सामान स्वयं बनाया जा सके, आश्रम व उसके लोग स्वयं की ज़रूरतों के लिए किसी कारीगर पर निर्भर ना रहें।

प्रश्न 2. गांधी जी ने अखिल भारतीय कांग्रेस सहित कई संस्थाओं व आंदोलनों का नेतृत्व किया। उनकी जीवनी या उन पर लिखी गई किताबों से उन अंशों को चुनिए जिनसे हिसाब-किताब के प्रति गांधी जी की चुस्ती का पता चलता है।
उत्तर : गांधी जी कोई भी कार्य बिना हिसाब किताब के नहीं करते थे। वे प्रत्येक विषय के प्रति नकारात्मक व सकारात्मक सोच बराबर रखते थे। निम्ने उदाहरणों द्वारा इस वक्तव्य को स्पष्टता दे सकते हैं-

1.  दांडी यात्रा’ के लिए गाँधी जी जब ‘रास’ नामक स्थान पर पहुँचे तो वहाँ निषेधाज्ञा लागू थी अर्थात कोई भी नेता किसी प्रकार के विचार जलूस-जलसे के रूप में नहीं प्रकट कर सकता था। गांधी जी तो लोगों को संबोधित किए बिना रह नहीं सकते थे तो पहले ही यह योजना बना ली गई कि यदि उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया तो अब्बास तैयबजी दांडी यात्रा का नेतृत्व करेंगे।

2.  असहयोग आंदोलन के समय भी वे यह हिसाब लगाने में पूर्णतया सक्ष्म थे कि किस स्थान पर किस तरह से ब्रिटिश शासन पर प्रहार करना है। यही कारण था कि लोग उनके हर विचार की कद्र करते थे और उनका कहा पूरी तरह से मानते थे। |

3.  वे बिल्कुल भी फिजूल खर्च न करते थे एक-एक पैसा सोच समझकरे खर्च करते थे यहाँ तक कि कई बार तो पच्चीस-पच्चीस किलोमीटर एक दिन में पैदल चलते थे। उनका मानना था कि धन को जरूरी कामों के लिए ही खर्च करना चाहिए। शानो-शौकत या वैभवपूर्व जीवन जीने के लिए नहीं।

4.  किसी भी आश्रम या सभा का हिसाब-किताब वे बहुत कुशलता से लगाते थे। साबरमती आश्रम में भी उन्होंने ऐसा बजट बनाया कि आने वाले मेहमानों के खर्च भी उसमें शामिल किए गए।

प्रश्न 3. मान लीजिए, आपको कोई बाल आश्रम खोलना है। इस बजट से प्रेरणा लेते हुए उसको अनुमानित बजट बनाइए। इस बजट में दिए गए किन-किन मदों पर आप कितना खर्च करना चाहेंगे। किन नई मदों को जोड़ना-हटाना चाहेंगे?
उत्तर-
छात्र इस पाठ से उदाहरण लेकर बाल आश्रम के लिए आवश्यक चीज़ों और उनके अनुमानित-खर्च का बजट तैयार करें।

प्रश्न 4. आपको कई बार लगता होगा कि आप कई छोटे-मोटे काम ( जैसे- घर की पुताई, दूध दुहना, खाट बुनना ) करना चाहें तो कर सकते हैं। ऐसे कामों की सूची बनाइए जिन्हें आप चाहकर भी नहीं सीख पाते। इसके क्या कारण रहे होंगे उन कामों की सूची भी बनाइए, जिन्हें आप सीख कर ही छोड़ेंगे?
उत्तर- हमारे जीवन में ऐसे बहुत से काम होते हैं जिसे हम चाहकर भी नहीं सीख पाते; जैसे- घर पुताई सफ़ेदीवाला करता है, दूधवाला दूध देता है और खाट (चारपाई) बुननेवाले से बुनवाई जाती है। कुछ ऐसे ही निम्न कार्य हैं, मैं चाहकर भी सीख नहीं पाता; जैसे

कार्य                           कारण

रोटी बनाने का कार्य              लगन की कमी

सिलाई करने का काम             सिखानेवाला नहीं मिला

चप्पल जूते में टाँका लगाना – जानकारी का अभाव एवं औजारों की कमी पर मैं इन कामों को सीखने का पूरा प्रयास कर रहा हूँ। मैं इन कामों को सीखकर ही दम लूंगा।

मैं इन कामों को सिखाने वाले प्रशिक्षित व्यक्ति के तालाश में हूँ। मैं इस काम को सीखकर ही दम लूँगा।

प्रश्न 5. इस अनुमानित बजट को गहराई से पढ़ने के बाद आश्रम के उद्देश्यों और कार्यप्रणाली के बारे में क्या-क्या अनुमान लगाए जा सकते हैं?
उत्तर - अनुमानित बजट को गहराई से अध्ययन करने के बाद हम आश्रम के उद्देश्यों को भलीभाँति समझ सकते हैं स्वावलंबन की भावना का विकास करना, अतिथि सत्कार करना, जरूरतमंदों को आवश्यक सुविधाएँ प्रदान करना, बेकार लोगों को आजीविका प्रदान करना, श्रम का महत्त्व समझना, कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देना, चरखे खादी आदि से स्वदेशी आंदोलन को बढ़ावा देना। सहयोग की भावना का विकास। इस आश्रम की कार्य प्रणाली का मुख्य आधार आत्मनिर्भरता है।

भाषा की बात

प्रश्न 1. अनुमानित शब्द अनुमान में इत प्रत्यय जोड़कर बना है। इत प्रत्यय जोड़ने पर अनुमान का ‘न’ नित में परिवर्तित हो जाता है। नीचे इत प्रत्यय वाले कुछ और शब्द लिखे हैं। उनमें मूल शब्द पहचानिए और देखिए कि क्या परिवर्तन हो रहा है

प्रमाणित 
व्यथित 
द्रवित 
मुखरित
झंकृत 
शिक्षित 
मोहित 
चर्चित

इत प्रत्यय की भाँति इक प्रत्यय से भी शब्द बनते हैं और तब शब्द के पहले अक्षर में भी परिवर्तन हो जाता है; जैसे सप्ताह के इक + साप्ताहिक। नीचे इक प्रत्यय से बनाए गए शब्द दिए गए हैं। इनमें मूल शब्द पहचानिए और देखिए कि क्या परिवर्तन हो रहा है

मौखिक

संवैधानिक

प्राथमिक

नैतिक

पौराणिक

दैनिक

उत्तर - इत प्रत्यय युक्त शब्द

मूल शब्द

प्रत्यय

प्रमाणित
झंकृत
व्यथित
द्रवित
मुखरित
शिक्षित
द्रवित
मोहित
मुखरित
चर्चित
मौखिक
नैतिक
संवैधानिक
पौराणिक
प्राथमिक
दैनिक

प्रमाण + इत
झंकार + इत
व्यथा + इत
द्रव + इत
मुखर + इत
शिक्षा + इत
द्रव + इत
मोह + इत
मुखर + इत
चर्चा + इत
मुख + इक
नीति + इक
संविधान + इक
पुराण + इक
प्रथम + इक
दिन + इक

प्रश्न 2. बैलगाड़ी और घोड़ागाड़ी शब्द दो शब्दों को जोड़ने से बने हैं। इसमें दूसरा शब्द प्रधान है, यानी शब्द का प्रमुख अर्थ दूसरे शब्द पर टिका है। ऐसे समास को तत्पुरुष समास कहते हैं। ऐसे छह शब्द और सोचकर लिखिए और समझिए कि उनमें दूसरा शब्द प्रमुख क्यों है?
उत्तर
राहखर्च          क्रीडाक्षेत्र
तुलसीकृत        घुड़सवार
गंगाजल         वनवास
इन शब्दों में दूसरा शब्द प्रमुख है क्योंकि दूसरा शब्द पहले शब्द की सार्थकता को स्पष्ट कर रहा है।

जैसे-
राहखर्च          राह के लिए खर्च
तुलसीकृत        तुलसी द्वारा कृत
गंगाजल         गंगा का जल
क्रीडाक्षेत्र         क्रीड़ा के लिए क्षेत्र
घुड़सवार         घोड़े पर सवार
वनवास         वन में वास

युद्ध क्षेत्र         युद्ध का मैदान

राजकुमार         राजा का कुमार

पवनचक्की        पवन से चलने वाली चक्की

रसोईघर          रसोई का घर

प्रधानमंत्री         मंत्रियों का प्रधान

हवाई जहाज़       हवा में उड़नेवाला जहाज़


NCERT Solutions for Class 7 Hindi Chapter 18 संघर्ष के कराण मैं तुनुकमिजाज हो गया धनराज

NCERT Solutions for Class 7 Hindi Chapter 18 संघर्ष के कराण मैं तुनुकमिजाज हो गया धनराज

 

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास

साक्षात्कार से
1: साक्षात्कार पढ़कर आपके मन में धनराज पिल्लै की कैसी छवि उभरती है? वर्णन कीजिए।

उत्तर - धनराज पिल्लै का साक्षात्कार पढ़कर यही छवि उभरती है कि वे सीधा-सरल जीवन व्यतीत करने वाले मध्यमवर्गीय परिवार से नाता रखने वाले हैं। वे देखने में बहुत सुंदर नहीं हैं। हॉकी के खेल में इतनी प्रसिद्धि प्राप्त करने का जरा भी अभिमान उनमें नहीं है। आम लोगों की भाँति लोकल ट्रेनों में सफर करने में भी कतराते नहीं। विशेष लोगों से मिलकर बहुत प्रसन्नता का अनुभव करते हैं। उन्हें माँ से बहुत लगाव है। इतनी प्रसिद्धि पाने पर भी आर्थिक समस्याओं से जूझते रहें। उन्हें हॉकी खेल से बहुत लगाव है। लोग भले ही उनको तुनुकमिज़ाज समझे लेकिन वे बहुत सरल हृदय मनुष्य हैं।

 

2: धनराज पिल्लै ने ज़मीन से उठकर आसमान का सितारा बनने तक की यात्रा तय की है। लगभग सौ शब्दों में इस सफ़र का वर्णन कीजिए।

उत्तर - धनराज पिल्लै का बचपन काफ़ी आर्थिक संकटों के बीच गुजरा है। उन्होंने गरीबी को काफ़ी करीब से देखा है। धनराज पिल्लै ने ज़मीन से उठकर आसमान का सितारा बनने तक का सफर तय किया है। उनके पास अपने लिए एक हॉकी स्टिक तक खरीदने के पैसे नहीं थे। शुरुआत में मित्रों से उधार लेकर और बाद में अपने बड़े भाई की पुरानी स्टिक से उन्होंने काम चलाया लेकिन आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई। अंत में मात्र 16 साल की उम्र में उन्हें मणिपुर में 1985 में जूनियर राष्ट्रीय हॉकी खेलने का मौका मिला। इसके बाद इन्हें सन् 1986 में सीनियर टीम में स्थान मिला। उस वर्ष अपने बड़े भाई के साथ मिलकर उन्होंने मुंबई लीग में अपने बेहतरीन खेल से खूब धूम मचाई। अंततः 1989 में उन्हें ऑलविन एशिया कप कैंप के लिए चुना गया। उसके बाद वे लगातार सफलता की सीढ़ियों पर चढ़ते रहे और उन्होंने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

 

3: ‘मेरी माँ ने मुझे अपनी प्रसिद्धि को विनम्रता से सँभालने की सीख दी है’-धनराज पिल्लै की इस बात का क्या अर्थ है?

उत्तर : सफलता से लोग प्राय: घंमड में अंधे हो जाते हैं। इसलिए धनराज पिल्लै की माँ ने उन्हें विनम्र रहने की सीख दी है। बड़ी-से-बड़ी कठिनाईयों को विन्रमता से हल किया जा सकता है। आदमी कितना भी बड़ा हो जाए, घमंड नहीं करना चाहिए। बल्कि, विनम्र ही रहना चाहिए जैसे फल से लदा एक पेड़ झुका रहता है।

 

साक्षात्कार से आगे

1: ध्यानचंद को हॉकी का जादूगर कहा जाता है। क्यों? पता लगाइए।

उत्तर : ध्यानचंद को हॉकी का जादूगर कहा जाता है क्योंकि जैसे जादूगर अपने दावपेंचों से हमारी ही आँखों के सामने न जाने क्या-क्या करतब कर दिखाता है और हम दाँतों तले उँगली दबा लेते हैं वैसे ही ध्यानचंद भी हॉकी खेलने में माहिर हैं। कोई भी ऐसा दावपेंच नहीं जो उन्हें न आता हो। कोई भी हॉकी में उन्हें मात नहीं दे सकता।

 

2: किन विशेषताओं के कारण हॉकी भारत का राष्ट्रीय खेल कहा जाता है?
उत्तर : हॉकी का खेल काफ़ी पहले ज़माने से भारत में खेला जाता रहा है। इसे राजा-महाराजाओं से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी बड़े चाव से खेला करते थे। आज भी इस खेल के प्रति रुचि देश एवं विदेशों में बना हुआ है। इस खेल को खेलने में अधिक पैसों की जरूरत नहीं पड़ती है। पुराने जमाने के लोग पेड़ों की टहनियों से इस खेल को खेला करते थे। यह खेल वर्षों से लगातार आगे ही बढ़ता जा रहा है। यह सीमित संसाधन में खेला जाने वाला खेल है। इसलिए इसे भारत का राष्ट्रीय खेल माना जाता है।

 

3: आप समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं में छपे हुए साक्षात्कार पढ़ें और अपनी रुचि से किसी व्यक्ति को चुनें, उसके बारे में जानकारी प्राप्त कर कुछ प्रश्न तैयार करें और साक्षात्कार लें।
उत्तर-
छात्र स्वयं करें।

4: किन विशेषताओं के कारण हॉकी भारत का राष्ट्रीय खेल माना जाता है?

उत्तर : हॉकी भारत में अतयन्त लोकप्रिय है। यह खेल भारत के सभी छोटे-बड़े शहरों में अनेकों वषों से खेला जाता रहा है। भारतीय खिलाड़ियों ने इस खेल में बहुत गौरव कमाया है। सन् 1928 से 1956 तक, भारत ने ओल्मिपक खेलों में लगातार छः स्वर्ण पदक जीते। अतः हॉकी भारत का राष्ट्रीय खेल माना जाता है।

अनुमान और कल्पना

प्रश्न 1. यह कोई जरूरी नहीं कि शोहरत पैसा भी साथ लेकर आए-‘क्या आप धनराज पिल्लै की इस बात से सहमत हैं? अपने अनुभव और बड़ों से बातचीत के आधार पर लिखिए।
उत्तर-
हम धनराज पिल्लै के इस बात से सहमत हैं कि कोई ज़रूरी नहीं कि शोहरत पैसा भी साथ लेकर आए। उनका यह कथन बिलकुल सच है क्योंकि धनराज को स्वयं जितनी शोहरत मिली उतना पैसा प्राप्त नहीं हुआ। वे काफ़ी समय तक आम लोगों की भाँति लोकल ट्रेनों में सफ़र करते रहे, जिसे देखकर लोग हैरान होते थे। हमारे देश में कई ऐसे उदाहरण हैं जिन्हें प्रसिद्ध व्यक्तियों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा है। मसलन प्रेमचंद, मशहूर शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ का उदाहरण ले सकते हैं। इन जैसे महान व्यक्तियों का जीवन आर्थिक तंगी के बीच व्यतीत हुआ है।

प्रश्न 2. (क) अपनी गलतियों के लिए माफ़ी माँगना आसान होता है या मुश्किल?
(ख) क्या आप और आपके आसपास के लोग अपनी गलतियों के लिए माफ़ी माँग लेते हैं?
(ग) माफ़ी माँगना मुश्किल होता है या माफ़ करना? अपने अनुभव के आधार पर लिखिए।
उत्तर-
(क) अपनी गलतियों के लिए माफ़ी माँगना कठिन होता है, क्योंकि हमें दूसरे के सामने अपने स्वाभिमान को झुकाना पड़ता है। माफ़ी माँगने का अर्थ है किसी के सामने झुकना अपने को छोटा बनाना।
(ख) नहीं, कई बार लोग गलती मानने को तैयार नहीं होते वे गलतियाँ करते हैं, साथ ही साथ अकड़ भी दिखाते हैं।
(ग) माफ़ी माँगना आसान है, जबकि माफ़ करना उससे ज्यादा कठिन है। माफ़ी माँगना इसलिए आसान है क्योंकि माफ़ माँगने के लिए एक बार झुककर अपने स्वाभिमान को झुकाना पड़ता है जबकि कभी-कभी माफ़ करना ज्यादा कठिन होता है क्योंकि जब कोई अपराध बड़ा होता है तो उस परिस्थिति में माफ़ कर पाना माफ़ी माँगने से ज्यादा कठिन होता है। कभी-कभी माफ़ करने वाला कई बार बिना माफ़ी माँगे ही माफ़ कर देता है।

भाषा की बात

1: नीचे कुछ शब्द लिखे हैं जिनमें अलग-अलग प्रत्ययों के कारण बारीक अंतर है। इस अंतर को समझाने के लिए इन शब्दों का वाक्य में प्रयोग कीजिए-

प्रेरणा, प्रेरक, प्रेरित

संभव, संभावित, संभवत:

उत्साह, उत्साहित , उत्साहवर्धक

उत्तर-
(क)
प्रेरणा-हमें महापुरुषों के विचारों से प्रेरणा लेनी चाहिए।
प्रेरक-महापुरुषों का जीवन सदैव जन-जन के प्रेरक रहे हैं।
प्रेरित-गुरु जी ने हमें उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित किया।
(ख)
संभव-आज उसका दिल्ली आना संभव है।
संभावित-अपनी संभावित कश्मीर यात्रा के लिए मुझे तैयारियाँ तो करनी होंगी।
संभवतः-संभवतः पिता जी आज दिल्ली आए।
(ग)
उत्साह-खेल के मैदान में खिलाड़ियों का उत्साह देखते बनता था।
उत्साह-इस त्योहार को लेकर मेरे मन में बड़ा उत्साह है।
उत्साहित-मैं इस यात्रा को लेकर काफ़ी उत्साहित हूँ।
उत्साहवर्धक-खेल के मैदान में प्रधानमंत्री का संदेश खिलाड़ियों के लिए उत्साहवर्धक था।

2: तुनुकमिज़ाज शब्द तुनुक और मिज़ाज दो शब्दों के मिलने से बना है। क्षणिक, तनिक और तुनुक एक ही शब्द के भिन्न रूप हैं। इस प्रकार का रूपांतर दूसरे शब्दों में भी होता है

जैसे – 

बादल, बादर, बदरा, बदरिया

मयूर, मयूरा, मोर

दर्पण, दर्पन, दरपन। 

शब्दकोश की सहायता लेकर एक ही शब्द के दो या दो से अधिक रूपों को खोजिए। कम-से-कम चार शब्द और उनके अन्य रूप लिखिए।

 

उत्तर :

(i) काजल – काजर, कजरा

(ii) चन्द्र– चाँद, चंदा

(iii) वर्षा – बरखा, बारिश

(iv) सूर्य – सूरज, सूरजा

 

3: हर खेल के अपने नियम, खेलने के तौर-तरीके और अपनी शब्दावली होती है। जिस खेल में आपकी रुचि हो उससे संबंधित कुछ शब्दों को लिखिए

जैसे-फुटबॉल के खेल से संबंधित शब्द हैं-गोल, बैकिंग, पासिंग, बूट इत्यादि।

उत्तर : गेंद, बल्ला, विकेट, रन, बल्लेबाज़, गेंदबाज़, अम्पायर इत्यादि।

30 Days Challenge

आपको 30 दिन challenge के हिसाब से 30 टॉपिक दिए जा रहे हैं और आपको नीचे कई सारी विधाएं दी गई हैं। इनमें से आप किसी भी एक विधा का चयन कर अपना ...